इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद कई शैक्षणिक संस्थान भी अभियान से जुड़ गए हैं, जो अपने परिसर में पालीथिन का उपयोग नहीं करने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक कर रहे हैं। इस अभियान में होलकर साइंस कालेज और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय सबसे आगे है, जिन्होंने अपने परिसर में प्लास्टिक को बैन कर दिया है। पहले कप और डिस्पोजेबल प्लेट का इस्तेमाल होता था। अब इनके स्थान पर चीनी, कांच और मिट्टी के बर्तनों ने जगह ले ली है। इतना ही नहीं, जागरूकता के लिए परिसर में जगह-जगह प्लास्टिक बैन करने को लेकर बोर्ड लगा दिए हैं। होलकर कालेज ने बोतलबंद पानी भी बंद करने की तैयारी की है और परिसर में वाटर कूलर लगाने की योजना है। उधर, विश्वविद्यालय के विभागों में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं को धीरे-धीरे का बंद किया जा रहा है।

ग्रीन कैंपस कैंपन - विश्वविद्यालय ने तक्षशिला परिसर को हरा-भरा करने की मुहिम चलाई है। ग्रीन कैंपस कैंपन के तहत परिसर में पालीथिन का उपयोग बंद कर दिया है। इसके लिए जगह-जगह डस्टबिन रखे हैं, ताकि प्लास्टिक की वस्तुओं को विद्यार्थी यहां-वहां न फेंक सके। विभागों में विद्यार्थियों को प्लास्टिक की बजाए स्टील की बोतल में पानी लगाने को कहा गया है।

शुरू करेंगे आइसीएच - होलकर साइंस कालेज के प्राचार्य डा. सुरेश सिलावट ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक को परिसर में बंद कर दिया है। कैंटीन भी बंद कर अब इंडियन काफी हाउस (आइसीएच) शुरू करने वाले हैं। आइसीएच संचालन को लेकर गाइडलाइन बनाई है। किसी भी प्रकार का प्लास्टिक परिसर में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यहां तक बोतल बंद पानी की बजाए वाटर कूलर की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग काफी हदतक कम होगा।

मिलेंगे अतिरिक्त अंक - इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आइक्यूएससी) प्रभारी डा. अमिय पहारे का कहना है कि कालेज में नैक निरीक्षण होना है, जिसमें पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए संस्थान का योगदान भी महत्वपूर्ण है। उसके तहत परिसर में प्लास्टिक को बैन किया है। धीरे-धीरे इसके प्रति विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है। निरीक्षण में इसके लिए अतिरिक्त अंक मिल सके।

जागरूकता जरूरी - शिक्षक डा. प्रमिला कोरी ने बताया कि स्वच्छता की दृष्टि से प्लास्टिक को बैन करने का फैसला अच्छा है। इसके लिए विद्यार्थियों को भ्ाी जागरूक किया जा रहा है।

दो बार करेंगे सेमिनार - कालेज के वाइस प्रिंसिपल डा. जीडी गुप्ता का कहना है कि स्वच्छता में इंदौर की अलग पहचान है। अब शैक्षणिक संस्थान अपनी भूमिका को समझते हुए पर्यावरण को बनाने रखने में योगदान दे रहे हैं। कालेज में महीनेभर में दो बार सेमिनार रखे जा रहे हैं, जिसमें प्लास्टिक से जुड़ी वस्तुएं से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में विद्यार्थियों को बताया जाएगा।

विश्वविद्यालय मेें निकाला आदेश - देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कैंपस प्रभारी प्रज्जवल खरे बताते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक कैंपन से विश्वविद्यालय तीन महीने पहले जुड़ चुका है। विश्वविद्यालय ने दोनों परिसर में प्लास्टिक व पालीथिन पर प्रतिबंध लगाने को लेकर जगह-जगह बोर्ड और पोस्टर लगाए हंै। वरिष्ठ अधिकारियों ने डिस्पोजेबल आयटम को इस्तेमाल बंद करने को लेकर आदेश भी निकाला है।

Posted By: Hemraj Yadav

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