जितेंद्र यादव, इंदौर Onion Price Indore। कीमतों के मामले में कभी जमीन तो कभी आसमान पर पहुंचने वाले प्याज के भाव नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार इस साल खरीफ सीजन में प्याज का रकबा बढ़ाने के भरपूर जतन कर रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार का उद्यानिकी विभाग किसानों को खरीफ सीजन में प्याज बोने को प्रोत्साहित करने के लिए 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का बीज अनुदान भी दे रहा है। प्रदेश में खरीफ सीजन की प्याज का रकबा बहुत कम है, जिसमें करीब 30 फीसद बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।

मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और अोडि़शा आदि राज्याें में भी खरीफ की प्याज का रकबा बढ़ाया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग खरीफ प्याज का रकबा जरूर बढ़ाने जा रहा है, लेकिन इस बार बीज की कमी मुश्किल बन रही है। उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) से किसानों को देने के लिए बीज लिया जा रहा है। एनएचआरडीएफ हर साल करीब 40 क्विंटल बीज उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन इस बार इसे 80 क्विंटल तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।

एनएचआरडीएफ इंदौर के सहायक निदेशक एके पांडे ने बताया कि इस साल किसानों को प्याज के भाव भी बेहतर मिले हैं। इसे देखते हुए वे भी खरीफ सीजन में प्याज लगाने के लिए आगे आ रहे हैं। इस साल तो बीज बढ़ाया ही है, अगले साल इसमें और इजाफा किया जाएगा। उद्यानिकी विभाग मुख्यालय के संयुक्त संचालक आईबी पटेल का कहना है कि एनएचआरडीएफ से तो हम कई जिलों को एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत प्याज का बीज उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन निजी कंपनियों से भी कई किसान बीज ले रहे हैं।

प्रदेश में प्याज की ज्यादा बुआई रबी में होती है। खरीफ में प्याज का रकबा बढ़ने से प्याज की उपलब्धता का संतुलन बना रहेगा। आलू-प्याज कमीशन एजेंट एसोसएिशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश गर्ग के मुताबिक, यह सही है कि खरीफ में प्याज कम होने से जून से लेकर अगस्त के बीच प्याज के भाव काफी बढ़ जाते हैं। दो-तीन साल पहले 50-60 रुपये तक रेट गए थे। मंडी में फिलहाल अच्छी प्याज का थोक भाव 20-22 रुपये किलो मिल रहा है। किसान को कम से कम इतना भाव तो मिलना चाहिए।

प्रदेश के इन जिलों में होता है खरीफ का प्याज

प्रदेश के उज्जैन, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़ जिलों में ही खरीफ के सीजन में प्याज हाेता है। अन्य जिलों के किसान केवल रबी में ही प्याज पैदा करते हैं। ऐसे में उद्यानिकी विभाग ने परंपरागत जिलों के अलावा रायसेन, होशंगाबाद, जबलपुर, छिंदवाड़ा, छतरपुर, सागर, दतिया, दमोह, सिंगरौली, डिंडौरी जैसे जिलों में भी खरीफ सीजन की प्याज फसल को प्रोत्साहित कर रहा है।

इंदौर के उद्यानिकी उप संचालक त्रिलोकचंद वास्केल ने बताया कि इंदौर में खरीफ प्याज का रकबा बहुत कम है। मानपुर, सांवेर और पिपल्दा, पेड़मी क्षेत्र में किसान परंपरागत रूप से खरीफ में भी प्याज उगाते हैं, लेकिन इंदौर को प्याज क्षेत्राच्छादन में नहीं लिया गया है। किसान सेना के प्रतिनिधि जगदीश रावलिया का कहना है कि इस बार प्याज का बीज खराब हो जाने से भाव अधिक है। इंदौर क्षेत्र में रबी सीजन में ही अधिक प्याज लगाई जाती है। वह भी दो साल से सितंबर-अक्टूबर में बारिश आ जाने से खराब हो रही है। सरकार को चाहिए कि वह प्याज की फसल की लागत के हिसाब से किसानों को पर्याप्त भाव उपलब्ध कराए।

Posted By: Sameer Deshpande

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