इंदौर (ब्यूरो)। डॉ. बाबा साहब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष अरविंद वासनिक ने बुधवार देर रात फांसी लगा ली। जिंदा होने की उम्मीद में परिजन निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने एमवाय अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया और शव परिजन को सौंप दिया।

अध्यक्ष के जेब से मिले सुसाइड नोट से पता चला है कि बीमारी की वजह से उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन समिति ने उन्हें दोबारा अध्यक्ष बना दिया था। संगठन के लोगों का आरोप है कि नई समिति के कुछ लोग सोशल मीडिया पर बदनाम कर रहे थे। पुतला जलाने की धमकी दे रहे थे। इस वजह से अध्यक्ष तनाव में थे।

तिलक नगर थाना पुलिस के मुताबिक, मृतक अरविंद वासनिक (74) निवासी वंदना नगर है। छोटे बेटे विजय ने बताया कि बुधवार को खाना खाने के बाद वह ऊपर अपने कमरे में चला गया था। रात करीब 12.20 बजे उसने पिता को उनके कमरे में बैठा देखा था। ठीक दस मिनट बाद बहन वीणा के चिल्लाने की आवाज आई। उसने शोर मचाकर नीचे बुलाया। वह भागकर गया तो पता चला कि पिता ने अपने कमरे में फांसी लगा लगी।

फंदा काटकर पिता को शकुंतला अस्पताल और फिर मेदांता अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। विजय ने बताया कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बहन वीणा कुछ दिन पहले ही घर आई थी। मां की कई वर्ष पहले मौत हो चुकी है। बड़ा भाई अभय केबल का व्यवसाय करता है। जबकि भाई अजय एग्रीकल्चर विभाग में नौकरी करता है।

समिति सदस्यों ने दोबारा चुना था अध्यक्ष

विजय ने बताया पिता डॉ. बाबा साहब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी महू के अध्यक्ष थे। उन्हें भंते संघशील की धार्मिक उपाधि मिली हुई थी। समिति के संगठन सचिव प्रकाश वानखेड़े ने बताया कि नई समिति के लिए 14 जून को चुनाव होने वाले थे, जिसकी घोषणा हो गई थी। लेकिन 12 जून को ही कार्यालय मंत्री मोहनराव बकोड़े ने सदस्यों को बुलाकर अपना मत रखने के लिए कहा था। सिर्फ 13 सदस्य आए और मत रखने के लिए मना कर दिया। 14 जून को निर्णय लेने का बोल दिया था। इस पर चुनाव हुआ और दोबारा सदस्यों के मत से पिता (अरविंद) को अध्यक्ष बना दिया था।

पद छोड़ने के लिए धमका रहे थे कुछ लोग

विजय के अनुसार, नई समिति बनाने और अध्यक्ष बनने की चाह में कुछ लोग पिता को बदनाम कर रहे थे। वाट्सएप और फेसबुक पर उनके खिलाफ अफवाह फैला रहे थे। लगातार उनके खिलाफ अनर्गल बातें लिख रहे थे। यही नहीं उन्हें पद छोड़ने के लिए भी धमकाया जा रहा था। जांच अधिकारी अवधराज सिंह बघेल के मुताबिक, मृतक से मिले सुसाइड नोट को जब्त कर लिया गया है। परिजन और संस्था से जुड़े लोगों के बयान लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह लिखा सुसाइड नोट में

दिनांक 20.6.2019

समय 00.15

मैं अरविंद वासनिक धार्मिक उपाधि भंते संघशील अध्यक्ष डॉ. बाबा साहब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी महू। मैं पिछले दो-तीन माह से बीमारी से ग्रस्त हूं। इसलिए अध्यक्ष पद से 30.4.19 को त्यागपत्र दे दिया था। जिसे 14.6.19 को कार्यकारिणी ने तथा सर्वसाधारण सभा ने अस्वीकृत कर मुझे अध्यक्ष पद पर बने रहने का आग्रह किया। इस दरमियान अध्यक्ष पद का चार्ज राजेश वानखेड़े के पास रहा। जिसे उन्होंने वहन किया। स्मारक समिति की स्थिति अंतर कलह से अत्यंत दयनीय है। मेरी रुग्ण अवस्था में तनाव के कारण मैं आत्महत्या कर रहा हूं। इसमें किसी का दोष नहीं है। आखिरी इच्छा है सभी 35 सदस्य विशेषत: राजेश वानखेड़े कार्यकारी अध्यक्ष पद ग्रहण कर स्मारक समिति फिर से पूर्वत: जीवंत करें, और यथासमय चुनाव कर भिक्षु अध्यक्ष बनवा लें। मेरे परिवार का ध्यान रखें।