इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हुकमचंद मिल मामले में हाई कोर्ट में चल रही याचिका में शुक्रवार को मिल मजदूरों की ओर से नगर निगम के जवाब पर प्रतिउत्तर दिया गया। इसमें कहा गया कि मिल की जमीन का मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद नगर निगम परिषद की बैठक में जमीन की लीज निरस्त करने का प्रस्ताव पास किया गया, यह कोर्ट की अवमानना है। इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। मिल की जमीन नगर निगम विकसित करे या आइडीए, मजदूरों को इससे मतलब नहीं। वे तो सिर्फ यह चाहते हैं कि सबसे पहले उनका भुगतान किया जाए। पैसों के अभाव में मजदूर जान गवां रहे हैं। मार्च से अब तक 29 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इनमें से तीन की मौत कोरोना से हुई है।

नगर निगम ने पहले कहा था कि वह मजदूरों का भुगतान करने को तैयार है, लेकिन पिछली सुनवाई पर उसने मिल की जमीन बेचने और मजदूरों के भुगतान से हाथ खींच लिए। उसका कहना है कि जमीन आइडीए विकसित कर सकता है। इसके लिए आइडीए और शासन से अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इसमें समय लगेगा। ऐसे में यह बताना मुश्किल है कि मजदूरों का भुगतान कब तक होगा। मजदूरों ने शुक्रवार को निगम के इसी जवाब का प्रतिउत्तर दिया है। मिल के अन्य लेनदार जिनमें कई बैंक शामिल हैं, ने निगम के जवाब पर प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। परिसमापक ने भी कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने तीन सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी। मामले में अब 12 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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