इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मैंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा से संगीत की दुनिया में कदम रखा लेकिन अब मैं सुगम संगीत की ही मंचीय प्रस्तुति देती हूं। आज के दौर में शास्त्रीय संगीत के श्रोता एक प्रतिशत ही हैं। संगीत मेरा 'प्रोफेशन" है और यदि इसमें मैंने लोगों की पसंद के अनुरूप नहीं गाया तो भला मुझे कौन सुनेगा, कौन आयोजन में बुलाएगा। इसलिए मैं शास्त्रीय गायन नहीं करती। पार्श्व गायन में भी मुझे ज्यादा आनंद नहीं आता। सुगम संगीत की मंचीय प्रस्तुति में मैं सौ नहीं बल्कि पांच सौ प्रतिशत समर्पण देती हूं, उसमें आनंदित रहती हूं।

यह कहना है गायिका राधा मंगेशकर का जो 24 जून शाम 6.30 बजे लाभ मंडपम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तुति देने गुुरुवार को शहर आईं। प्रेस क्लब में चाय पर चर्चा कार्यक्रम में वे मंगेशकर परिवार खासतौर पर लता मंगेशकर से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देने से कतराती रहीं। लता मंगेशकर की स्मृतियों व शहर से जुड़ाव के प्रश्न को भी वे निजी जीवन का प्रश्न कहकर टाल गईं। हृदयनाथ मंगेशकर की पुत्री राधा का कहना है कि वे संगीत के क्षेत्र में मंगेशकर परिवार की वारिस होने का दबाव कभी महसूस नहीं करती। राधा मंगेशकर कहती हैं अच्छा गाने का दबाव तो लोग ही डालते हैं, मैं उसे महसूस नहीं करती। यदि दबाव महसूस करती तो कब का संगीत छोड़ चुकी होती। मेरा विश्वास तो कला और साधना पर है। जहां तक मंचीय प्रस्तुति में कलाकार पर दबाव की बात है तो वह पहली प्रस्तुति हो या सौवीं, सभी में रहता है। यह दबाव कोई और नहीं डालता बल्कि अच्छी प्रस्तुुति के लिए कलाकार ही महसूस करता है।

सदाबहार गीतों की प्रस्तुति देंगी राधा मंगेशकर

इंदौर। अभय प्रशाल स्पोर्ट्स के तत्वावधान में 24 जून को सुरीले गीतों भरी शाम का आयोजन लाभ मंडपम रेसकोर्स रोड पर शाम 6.30 बजे किया जाएगा। आशुतोष कड़ले और अंकुर वर्मा ने बताया कि हृदयनाथ मंगेशकर की पुत्री और लता मंगेशकर की भतीजी राधा मंगेशकर सदाबहार गीतों की प्रस्तुति देंगी। इसके अतिरिक्त पुणे के विनोद सुर्वे और शहर के स्थानीय कलाकार भी प्रस्तुति देंगे। आयोजन सभी संगीत प्रेमियों के लिए खुला रहेगा।

Posted By: Hemraj Yadav

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