इंदौर, Remdesivir Shortage in Indore। कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रही रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को लेकर हाहाकार मचा है। इंजेक्शन की जमकर कालाबाजारी हो रही है। गंभीर मरीज को सामान्यत: छह इंजेक्शन की खुराक लगाई जाती है। कालाबाजारी का आलम यह है कि 750 से 1400 रुपये तक के होलसेल रेट वाले इंजेक्शन की बाजार में कीमत 1200 से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली जा रही है। मनमानी कीमत देने के बावजूद मरीज के स्वजन को इंजेक्शन नहीं मिल रहा। बुधवार दुकानों के बाहर इस कदर भीड़ उमड़ रही है कि कोरोना प्रोटोकाल तार-तार हो रहा है। हालत यह है कि बुधवार सुबह से ही शहर के कई मेडिकल स्टोर्स के बाहर इंजेक्शन खरीदने वालों की भीड़ लग गई। इसे नियंत्रित करने के लिए कतारें लगवानी पड़ीं।

कई दुकानदारों ने तो दुकानों के बाहर बोर्ड भी लगवा दिए कि रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। एक दिन पहले ही कलेक्टर ने इस इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे, लेकिन इसका भी असर नजर नहीं आया। बुधवार दोपहर दवा बाजार में हालत यह थी कि जिन मेडिकल दुकानों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध था, उनके बाहर सैकड़ों खरीदारों की भीड़ मौजूद थी।

इंदौर में किल्लत का असर पूरे प्रदेश पर

इंदौर के दवा बाजार से प्रदेश के कई जिलों में दवाइयां जाती है। यहां रेमडेसिविर की किल्लत होने का असर पूरे प्रदेश पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मांग इंदौर ही में है। यहां रोजाना 800 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। कई मरीज ऐसे भी हैं, जो सिर्फ सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर इंजेक्शन लगवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार जनवरीफरवरी में मरीजों की संख्या कम होने पर कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया था, लेकिन मार्च के दूसरे पखवाड़े से मरीज बढ़ने से टोटा हो गया।

'देखे हुए दिन बीत गए'

बांबे हास्पिटल के आसपास दर्जनभर मेडिकल स्टोर्स में किसी के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं है। कोरोना संक्रमित लोगों के स्वजन महाराजा छत्रसाल चौराहा स्थित दो प्रमुख मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचे और इंजेक्शन मांगा तो स्टोर्स से जवाब मिला कि देखे हुए कई दिन बीत गए हैं। हमें ही नहीं मिल रहा है तो आपको कहां से दें। यही हाल महालक्ष्मी नगर, तुलसीनगर, रेडीसन चौराहा स्थित मेडिकल स्टोर्स का है। दवाइयां लेने आए महालक्ष्मी नगर निवासी विजय तिवारी ने कहा शासन-प्रशासन इंतजाम कर

बुधवार को शहर में दो कंपनियों के 1200 इंजेक्शन पहुंचे, जबकि इंदौर में अभी 15 से 17 हजार इंजेक्शन की जरूरत है। उम्मीद है कि 10 अप्रैल तक इंदौर में काफी मात्रा में इंजेक्शन का स्टाक उपलब्ध होगा। रेमडेसिविर इंजेक्शन को तैयार करके बाद 18 दिन तक इंक्यूबेशन में रखना पड़ता है। इस कारण इस इंजेक्शन को तैयार करने में कंपनियों को समय लग रहा है। - राजीव सिंघल, जनरल सेक्रेटरी मप्र केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन

Posted By: Prashant Pandey

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