इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। संविधान दिवस के उपलक्ष्य में कबीर जन विकास समूह द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। आनलाइन आयोजित हुए इस कार्यक्रम में कबीर के विचारों पर केंद्रित रचनाएं भी पेश की गई तो सामाजिक बदलाव के विषयों को आधार बनाकर भी रचना पाठ हुआ। गीतों की भी प्रस्तुतियां इस कार्यक्रम में दी गई तो वैचारिक मंथन से भी इस आयोजन को और भी समृध्द बनाया गया।

संस्था के इस 27वें आनलाइन आयोजन में लेखिका और कवियत्री रोशनी वर्मा का काव्य पाठ हुआ। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन विषय पर चुनिंदा कविताएं सुनाई। रोशनी वर्मा ने स्वरचित कविता "कविता में स्त्री, वह मुस्कुराई, घर वापसी, अशांत समय, बचे हुए लोग' सुनाकर तो वाहवाही लूटी ही साथ ही कोरोनाकाल में समाज में फैली अशांति, डर और निराशा का भी बखूबी वर्णन उन्होंने कविता के माध्यम से किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में गीतों का समावेश यह गीत वे थे जो समाज को संदेश देने के लिए रचे गए थे। किसी गीत के माध्यम से सामाजिक बदलाव की बात की गई तो किसी से आध्यात्म का राह दिखाई गई। युवा गायक माखन देवड़ा एवं उनके साथियों ने सबसे पहले "कबीर काशी के वासी...'भजन प्रस्तुत किया।

इसके बाद "तू शब्दों का दास रे योगी तेरा क्या विश्वास रे..., कहे कबीर सुनो भई साधो यह जग आना-जाना रे..., इसे देख क्या रोता रे पगले ये मिट्टी का खिलौना रे..., "मन लागो मेरो यार फकीरी में आदि भजन प्रस्तुत किए गए जिन्होंने कार्यक्रम को और भी सकारात्मक बना दिया। गायकी के साथ वादन का भी रंग यहां बखूबी जमा। इसमें गिटार पर आलेख पटेलिया ने और कोरस में सचिन चौहान ने साथ दिया। कार्यक्रम संयोजक संस्था सचिव छोटेलाल भारती थे। तकनीकी सहयोग विनोद जाटव ने दिया। आभार कबीर जनविकास समूह के अध्यक्ष डा. सुरेश पटेल ने माना।

Posted By: gajendra.nagar

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