Road Safety Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्कूली बच्चें अकसर यातायात नियमों को लेकर लापरवाही करते हैं। कई बच्चे बिना लाइसेंस और हेलमेट के वाहन चलाते हैं। इससे दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बन रहता है। अगर कोई अपना वाहन बच्चों को चलाने के लिए देता है और उसके पास लाइसेंस नहीं होता है तो दुर्घटना होने पर वाहन मालिक पर भी कार्रवाई होती है। स्कूल के विद्यार्थियों को 16 साल की उम्र पूर्ण करने पर बिना गियर वाले वाहन चलाने का लाइसेंस मिल जाता है। 18 वर्ष की उम्र में गियर वाले वाहनों के लिए लाइसेंस मिल जाता है और कमर्शियल वाहनों के लिए 21 वर्ष की उम्र तय है। लर्निंग लाइसेंस पर कुछ नियम लिखे होते हैं उसके अनुसार ही वाहन चलाना चाहिए।

यह कहना है एसीपी (यातायात) अरविंद तिवारी का। नईदुनिया के सड़क सुरक्षा अभियान के तहत शनिवार को श्री बाल विनय मंदिर छत्रीबाग में विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को वाहन चलाते समय ध्यान रखने वाली बातें और यातायात के नियमों की पूरी जानकारी दी गई। कई विद्यार्थियों ने यातायात से संबंधित प्रश्न भी पूछे जिनका जवाब एसीपी ने दिए।

जेल की सजा भी होती है - एसीपी अरविंद तिवारी ने कहा कि अगर किसी के पास लाइसेंस नहीं होता है और उससे दुर्घटना हो जाती है तो ऐसे मामले में बहुत सख्त नियम हैं। ऐसे मामले में जेल जाना पड़ता है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर बिना लाइसेंस वाहन चलाते हैं तो एक हजार का चालान बनाया जाता है, लेकिन पुलिस अगर मामले को कोर्ट में भेज देती है तो वहां दस हजार रुपये दंड के रूप में भरने पड़ते हैं।

हेलमेट पहनना अनिवार्य - एसीपी तिवारी ने विद्यार्थियों को कहा कि अगर आपके पास लाइसेंस है और वाहन चलाते हैं तो हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। ज्यादातर गंभीर दुर्घटनाएं इसलिए होती है क्योंकि वाहन चालकों के सिर में चोट आती है। ऐसे में हेलमेट के उपयोग से गंभीर दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। दुर्घटनाओं के कारण परिवार के सदस्य भी बहुत परेशान होते हैं। इलाज में लाखों रुपये लग जाते हैं।

तेज वाहन न चलाएं - वाहन चलाते समय गति का भी ध्यान रखना चाहिए। कई बार युवा तेज गति में वाहन चलाते हैं, लेकिन आप अगर गंभीरता से सोचेंगे तो पता लगेगा कि किसी स्थान पर सामान्य और तेज गति में पहुंचने के समय में ज्यादा अंतर नहीं आता। हर वाहन चालक को सिग्नल पर रुकना ही पड़ता है।

यातायात सुधारने में मदद करें - एसीपी ने कहा कि विद्यार्थी भी शहर का यातायात सुधारने में मदद कर सकते हैं। वे भी अपना कुछ समय शहर के चौराहे पर दे सकते हैं। इससे उन्हें यातायात का प्रबंधन भी पता लगेगा और समाजसेवा की भावना भी जाग्रत होगी।

वाहन धीरे चलाएं स्कूली बस चालक - एसीपी अरविंद तिवारी ने वाहन चालकों को भी कहा कि भले वे स्कूल या बच्चों की कालोनी तक पहुंचने में थोड़ा लेट हो जाए, लेकिन जल्दबाजी में बस न चलाएं। कई बार समय पर पहुंचने की जल्दी के कारण दुर्घटनाएं होती है। जिम्मेदारी से बस चलाना चाहिए और कंडक्टर को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को चलती बस में न चढ़ाए और न उतारे। बच्चों को बस में उतारते और बैठाते पीछे से कोई वाहन तो नहीं आ रहा है इसे अच्छी तरह से देखना चाहिए। श्री बाल विनय मंदिर छत्रीबाग की प्राचार्या श्वेता गर्ग ने भी नईदुनिया के सड़क सुरक्षा अभियान को सभी के लिए कारगर बताते हुए विद्यार्थियों को नियमों का पालन करने का अनुरोध किया।

Posted By: Hemraj Yadav

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