इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। 12वीं में बायो संकाय में 96 प्रतिशत लाने वाली सागर की साक्षी पिछले तीन से चार महीने से बीमार है। उसे शुरुआत में जोड़ो में दर्द हो रहा था। इसके बाद डॉक्टरों दिखाया तो उन्होंने बताया कि इसे सिस्टेमेटिक लूपूस अर्थेमाटोसस एसएलई की बीमारी है। इसके कारण उसके लीवर ने काम करना बंद कर दिया है। 18 वर्षीय साक्षी राजोरिया इंदौर के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती है और अब जीवन से संघर्ष कर रही है। उन्हें डॉक्टरों ने उसका लीवर ट्रांसप्लांट ही विकल्प बताया है। साक्षी के रिश्तेदार रिषी उपाध्याय के मुताबिक साक्षी की मां साधना राजौरिया सरकारी स्कूल की शिक्षिका है और उन्हें आंखों से दिखाई नहीं देता है।

सीएम ने टवीट् कर कहा प्रतिभावान साक्षी की हरसंभव करेंगे मदद

साक्षी के इलाज में मदद के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह हरसंभव मदद करने की बात कही है। नईदुनिया डाॅट कॉम पर रविवार को सागर की प्रतिभावान बेटी के इलाज के लिए मदद की जरूरत वाली खबर जारी हुई। साक्षी के परिजन उसकी बीमारी के बाद से ही मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद का प्रयास कर रहे थे। रविवार को करीब 3.30 बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर लिखा कि ‘मैने साक्षी बेटी के संबंध में कलेक्टर को निर्देश दिए है। शीघ्र ही प्रशासन परिवार से संपर्क कर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करेगा। बेटी की हरसंभव मदद की जाएगी। मेरी प्रतिभावान बेटी और उसके परिवार को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। इसके पूर्व के एक दिन पहले साक्षी को जानने वाले नितेन्द्र व्यास ने भी सीएम को ट्वीट कर साक्षी की बीमारी और परेशानी से उन्हें अवगत करवाया था।

परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। साक्षी के पिता सुधीर राजोरिया का पूर्व में बिजनेस था जिसमें उन्हें लॉस हुआ को कारोबार ठप हो गया। लीवर ट्रांसप्लांट के लिए साक्षी बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लीवर डोनर की आवश्यकता है। इसके इलाज के लिए 25 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। इंदौर में पिछले एक हफ्ते से मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती है और 1 लाख रुपये इलाज में खर्च हो चुके है। रिषि के मुताबिक लीवर ट्रांसप्लांट के लिए डोनर के अलावा डॉक्टरों ने करीब 25 लाख रुपये का खर्च बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हमने साक्षी को परेशानी को शनिवार को शेयर किया था। इसके बाद से अभी तक सोशल मीडिया के माध्यम जुड़े लोगों से अभी तक एक लाख रुपये की मदद मिल चुकी है। हम मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद पाने का प्रयास कर रहे है।

Posted By: Prashant Pandey

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