इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का काम करने में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद कुछ सुपरवाइजरों की लापरवाही के कारण लक्ष्य में पिछड़े हुए हैं। शहरी परियोजनाओं की जिन सुपरवाइजर की प्रगति कम है, उनका वेतन रोका जा रहा है। साथ ही कुछ लापरवाह सुपरवाइजर के क्षेत्र भी बदले जाएंगे।

इस संबंध में कलेक्टर मनीषसिंह ने जिला परियोजना अधिकारी डॉ. सीएल पासी को साफ तौर पर निर्देश हैं कि जो सुपरवाइजर लापरवाही कर रहे हैं, उनका वेतन तब तक न दिया जाए जब तक वे लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं करते। उन्होंने शहरी परियोजनाओं के कुछ सुपरवाइजर को इंदौर से हटाकर ग्रामीण परियोजना में चंद्रावतीगंज भेजने के निर्देश भी दिए हैं। इसमें हर्षा जेठवा, वर्षा बघेल, अनिता मंसूरी, राधा यादव आदि शामिल हैं। योजना को लेकर हाल ही में हुई उन्होंने समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा है कि इस मामले में वे एक सप्ताह बाद रविवार को फिर बैठक लेंगे।

उल्लेखनीय है कि योजना के तहत पहली बार गर्भवती हुई महिलाओं का पंजीयन किया जाता है। गरीब और जरूरतमंद परिवार की ऐसी महिलाएं जो घरों, दुकानों या कारखानों में अस्थायी तौर पर काम करती हैं, गर्भवती होने पर उनका वेतन रुक जाता है। गर्भवती होने पर एक तो इलाज और प्रसूति में उनका खर्च होता है, उल्टे उनकी आय भी रुक जाती है। ऐसी महिलाओं के पहली बार गर्भवती होने पर सरकार ने पांच हजार रुपये की सहायता देने की योजना शुरू की है। इस राशि से महिला प्रसूति के दौरान अपने जरूरी खर्च पूरे कर सकती है।

Posted By: Sameer Deshpande

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