MPCA Elections: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) में वर्तमान कार्यकारिणी को ही दोबारा सत्ता सौंपने की तैयारी है। प्रदेश के सबसे धनाड्य खेल संघ में आठ साल बाद पहला मौका होगा जब चुनाव की नौबत नहीं आएगी। हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। छह दिसंबर को फार्म लेने के बाद आठ को नाम वापसी के साथ स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

एमपीसीए की वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) और आगामी तीन साल के लिए निर्वाचन 10 दिसंबर को होना हैं। एमपीसीए में सत्ताधारी ज्योतिरादित्य सिंधिया और संजय जगदाले गुट के लोग ही वर्तमान पदाधिकारियों के रूखे व्यवहार को लेकर नाखुशी जताते हुए बदलाव की मांग कर रहे थे। वहीं कुर्सी पर काबिज चेहरों ने पहली बार रणजी टीम की जीत सहित अन्य उपलब्धियां गिनवाईं। नाराज धड़ा चुनाव के लिए चेहरे भी तैयार करने में जुटा था जबकि चुनाव की नौबत देखते हुए पदाधिकारी भी मतों की जुगाड़ में जुट गए थे।

सूत्रों के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फिलहाल वही कार्यकारिणी दोहराने पर सहमति जता दी है। जिसके बाद तय हो गया है कि एमपीसीए में चुनाव नहीं होंगे और निर्विरोध निर्वाचन होगा। पिछली बार भी सिर्फ सचिव पद के लिए चुनाव हुआ था और इस बार भी इस पद के लिए पूर्व रणजी कप्तान अमिताभ विजयवर्गीय होड़ में थे। पिछले चुनाव में भी वे महीन अंतर से पीछे रहे थे। इस बार उन्हें सिंधिया-जगदाले गुट के नाराज धड़े का भी समर्थन था। मगर सिंधिया के मनाने पर वे पीछे हट गए हैं।

सदस्यों को लिखे संदेश में उन्होंने कहा- 'मैं सचिव पद का चुनाव लड़ने और जीतने का संभावित दावेदार था, लेकिन महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) ने चुनाव नहीं लड़ने को कहा है क्योंकि वे नहीं चाहते कि परिवार में चुनाव की स्थिति बने। उनके सम्मान में मैं पीछे हट रहा हूं।" उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के बाद से पहली बार होगा जब एमपीसीए में चुनाव की नौबत नहीं आएगी। तब संजय जगदाले अध्यक्ष और सचिव मिलिंद कनमड़ीकर बने थे।

नाराज सदस्यों के प्रयास जारी : विजयवर्गीय के पीछे हटने के बाद तय हो गया है कि अब चुनाव की नौबत नहीं आएगी। मगर एमपीसीए की राजनीति से जुड़े पुराने चेहरे अब भी सिंधिया तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं। रविवार को सदस्यों के एक समूह ने होलकर स्टेडियम में संजय जगदाले से चर्चा कर अपनी बात रखी।

Posted By: Sameer Deshpande

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