इंदौर। अमेरिका के शिकागो में रह रहे बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने और उनकी जरूरतों को पूरा करने के काम में भारतीय महिला पिछले 30 सालों से लगी हुई हैं। वह शिकागो और उससे जुड़े 250 शहरों के करीब साढ़े 3 हजार वरिष्ठ नागरिकों को सहारा दे रही हैं। अब तक 10 हजार से ज्यादा बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने और समस्याओं का निवारण करने के लिए उसे शिकागो की मदर टेरेसा के नाम से जाना जाता है। यह महिला है संतोष कुलश्रेष्ठ कुमार। मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली संतोष तीन दशक से शिकागो के बुजुर्गों को निशुल्क सेवा दे रही हैं। शनिवार को वे निजी कार्यक्रम में इंदौर आई थीं। वे मेट्रोपॉलिटिन एशियन फैमिली सर्विसेज एंड यूनिवर्सल मेट्रो सर्विसेज के माध्यम से शिकागो में सेवा कार्य कर रही हैं। वे बताती हैं कि विदेश में भारत या अन्य देशों से आने वाले बुजुर्गों की स्थिति बहुत खराब है। वहां बच्चों को बुजुर्ग माता-पिता से बात करने और उनकी दैनिक परेशानी समझने के लिए भी वक्त नहीं है।

विदेशी तकनीकी से परिचित नहीं होने के कारण बुजुर्ग खाने-पीने, नहाने और अपनी दैनिक दिनचर्या के काम करने के लिए भी दूसरों के मोहताज हो जाते हैं। बुजुर्गों की इस परेशानी को दूर करने के लिए 'होम सर्विस' और शेल्टर होम शुरू किए। होम सर्विस के तहत एक प्रशिक्षित व्यक्ति प्रतिदिन बुजुर्गों के घर जाकर उनके छोटे से छोटे काम करता है। उन्हें खिलाने-पिलाने से लेकर उनकी दवाइयों, रूटीन चेकअप और मनोरंजन का भी ध्यान रखता है। इस तरह करीब छह हजार कर्मचारी अलग-अलग शहरों के 14 केंद्रों के माध्यम से काम कर रहे हैं। साथ ही संतोष ऐसे कई शेल्टर होम संचालित कर रही हैं, जहां बुजुर्गों को प्रतिदिन घर से लाने से लेकर छोड़ने तक की व्यवस्था रहती है। केंद्र पर उन्हें दोनों वक्त का भोजन, नाश्ता और उनकी सेहत का ध्यान रखा जाता है।

बचपन से ही अन्याय के विरुद्ध लड़ने की जाग गई इच्छा

संतोष कहती हैं कि बचपन से घर के आसपास अमीर-गरीब में भेद, छुआछूत, अशिक्षा, महिलाओं से भेदभाव जैसी कई समस्याएं देखीं। बचपन से ही अन्याय के विरुद्ध लड़ने की इच्छा जाग गई। इसके लिए वकालत पढ़ी। उत्तर प्रदेश में शादी हुई और पति शिकागो में पदस्थ थे। करीब 1985 से शिकागो में वकालत शुरू की और धीरे-धीरे वहां भारतीय बुजुर्गों की सहायता करना शुरू किया। अब प्रत्येक देश और वहां के मूल निवासियों की भी समस्याएं सुलझाते हैं। उनके लिए निशुल्क कानूनी लड़ाई भी लड़ते हैं। 30 वर्षों से चल रहे इस काम के लिए 70 फीसदी फंड यूएसए शासन और 30 प्रतिशत फंड संतोष द्वारा स्वयं जुटाया जाता है। सेवा कार्यों के लिए संतोष को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा मदर टेरेसा ऑफ शिकागो सहित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी सहित दिल्ली, गुजरात, राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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