- ऑनलाइन कार्यशाला में सिखाया सत्तू बनाना व डेकोरट करना

इंदौर (नईदुनिया रिपोर्टर)। सत्तू केवल मिठाई या परंपरा का अंग ही नहीं है, यह कला भी है। फिर चाहे इसे बनाने की बात हो या सजाने की। बेहतर सत्तू बनाने के लिए सबसे सीधा सा मंत्र यह है कि सत्तू का आटा चाहे जो भी हो यदि वह एक किलो लिया है तो घी और शकर दोनों ही आठ सौ-आठ सौ ग्राम लेना चाहिए। इसके अलावा सत्तू में जिस घी का इस्तेमाल किया जा रहा है वह न तो गर्म हो ना ही बहुत ठंडा। सामान्य तापमान वाला ही घी लें, ताकि को सत्तू आकार देते वक्त वह फटे नहीं। यदि सत्तू पर घी की चमक लाना चाहते हैं तो सत्तू बनने के बाद उस पर ब्रश से घी लगा दें। सबसे खास बात यह है कि सत्तू को अलग-अलग आकार में बनाएं और उन्हें सजाएं। यह जानकारी शहर की प्रियंका काबरा और मुंबई की मोनाली काबरा ने सत्तू मेकिंग व डेकोरेशन वर्कशॉप में दी। महिलाओं के समूह 'उपहार क्रिएशन' द्वारा यह कार्यशाला ऑनलाइन आयोजित की गई थी। इसमें महिलाओं को राखी बनाना, लिफाफे बनाना और सत्तू बनाने के साथ उसे सजाने के बारे में विशेषज्ञों ने बताया।

प्रियंका काबरा और मोनाली काबरा ने सत्तू को डॉल, तरबूज, कैंडी आदि आकार में डेकोरेट करना बताया। साथ ही यह भी बताया कि खाने के रंग से सत्तू पर ब्रश की मदद से शेडिंग कर उसे और भी खूबसूरत बनाया जा सकता है। सत्तू को सजाने के लिए सूखे मेवे जैसे बादाम, पिस्ता, काजू, नारियल का इस्तेमाल करें और इन्हें करीने से काटकर लगाएं। इन्होंने सूखे मेवों को मनचाहे आकार में काटना भी बताया। उन्होंने बताया कि यदि चने का सत्तू है तो उस पर गेहूं व चावल से बने सत्तू को भी सजाया जा सकता है।

बेकार चीजों से बनाए खूबसूरत आइटम

कविता मंत्री ने घर में बेकार पड़ी वस्तुएं जैसे मौली, सुतली, टाट, पिस्ता के छिलके, ईयर बड्स आदि की मदद से राखी बनाना बताया। उन्होंने घर में रखी विवाह पत्रिकाओं से लिफाफे बनाना भी सिखाया। घर में रखे रंगीन कागजों से पोटलीनुमा पर्स, कप, गुलदस्ते, फूलदान, कलश आदि बनाना बताया। सरला हेडा और अर्चना भूतड़ा ने आयोजन के बारे में महिलाओं को संबोधित किया। संचालन अर्चना के. माहेश्वरी ने किया। आभार मीना चौधरी, माधुरी सोलंकी व मंजू मोहता ने माना।

तीन दिनी कार्यशाला संपन्ना

पश्चिमी मध्यप्रदेश प्रादेशिक महिला संगठन द्वारा पर्व एवं संस्कृति समिति के अंतर्गत सृजन कार्यशाला संपन्ना हुई। तीन दिनी इस कार्यशाला के पहले दिन 10 तरह की राखियां बनाने का प्रशिक्षण शोभा भूतड़ा ने दिया। दूसरे दिन उर्मी बागड़ी ने लो कैलोरी चायनीज कोन, मैक्सिकन बुरिटो बाउल, पुडिंग व डोनट बनाना सिखाया। तीसरे व अंतिम दिन अपूर्वा अग्रवाल ने मंडला आर्ट एवं कॉफी पेंटिंग के गुर बताए।

फोटोः सत्तू और लिफाफे के हैं।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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