लोकेश सोलंकी, इंदौर, Remdesivir Injection Black Marketing Indore। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों पर हो रही सरकारी कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं। महीनेभर पहले सरजूप्रसाद मार्ग पर स्थित राज मेडिकल स्टोर को प्रशासन ने सील कर ड्रग लाइसेंस भी निरस्त कर दिया था। मेडिकल स्टोर से रेमडेसिविर इंजेक्शन 10 हजार रुपये में ब्लैक किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। नौ अप्रैल को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने ड्रग लाइसेंस निरस्त कर दिया था। 15 दिन बाद 24 अप्रैल को एफडीए ने आदेश में संशोधन कर दिया। नए आदेश में लिखा गया है, आपदा के समय जन सुविधा के लिए सभी मेडिकल स्टोर्स का सतत कार्य करना आवश्यक है।

कार्रवाई पर यू टर्न के इस आदेश के साथ दुकानदार को महज हिदायत दी गई है, आगे से वह सही मूल्य पर दवा बेचे। गोकुलदास अस्पताल के सामने बीते महीने सील हुए इस मेडिकल स्टोर के बारे में काफी शोर मचा था कि पूर्व पार्षद और भाजपा नेता के पति का मेडिकल स्टोर होते हुए भी प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई की, लेकिन 15 दिन बाद ही पुराने आदेश में खामोशी से संशोधन कर, निरस्त ड्रग लाइसेंस तुरत-फुरत बहाली के निर्णय से प्रशासन की मंशा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

दवा कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट के नियमों में स्पष्ट लिखा है निरस्त लाइसेंस पर कार्रवाई गलत की गई है, तो भी तीन महीने के भीतर लाइसेंसधारी प्रभावित व्यक्ति को राज्य सरकार के सामने अपील करनी होती है। तब सरकार नियमानुसार उस पर निर्णय ले सकती है। लाइसेंस बहाल होने के आदेश की पुष्टि करते हुए एफडीए के अधिकारी योगेश गुप्ता ने कहा कि अपील के बाद केमिस्ट का लाइसेंस बहाल कर दिया गया।

भ्रमित हो गया था विभाग

दुकान संचालक फार्मासिस्ट राजेंद्र अग्रवाल का कहना है ड्रग लाइसेंस बहाल कर दिया गया है। प्रशासन भ्रमित हो गया था। सिर्फ दो वायल रेमडेसिविर का मामला था। मैंने एमआरपी पर बेचे थे। जब दुकान सील की और कहा गया कि मैं भाग गया हूं, तब तो मैं एडीएम अभय बेड़ेकर के सामने बैठा था। प्रशासन भ्रम में था कि मैंने ज्यादा कीमत पर बेचे। नियम तो 20 प्रतिशत मुनाफे का है, मैंने तो 999 में ही इंजेक्शन बेच दिए थे। मैंने बिल भी प्रस्तुत किया।

Posted By: Prashant Pandey

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