इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। होलकर काल में इंदौर शहर का व्यापारिक दृष्टि से काफी विशेष महत्व था। इंदौर के प्रतिष्ठित व्यापारी सर सेठ हुकमचंद कपास और अफीम का दुनियाभर में भाव क्या रहेगा, यह तय करते थे। इस तरह इंदौर का व्यापार लगातार देश-विदेशों तक बढ़ता रहा था। ये बातें रविवार को हेरिटेज वाक के दौरान इंदौर के इतिहास के जानकार प्रकाश इंदुरकर ने बताई।

रविवार सुबह 8 बजे सीपी शेखर नगर उद्यान से शुरू हुई हेरिटेज वाक राजवाड़ा होते हुए कृष्णपुरा छत्री पर खत्म हुई। इस हेरिटेज वाक में यूथ हास्टल एसोसिएशन आफ इंडिया के इंदौर जिला शाखा के 25 सदस्य शामिल हुए। प्रकाश इंदूरकर ने बताया कि इंदौर शहर में पहली स्मार्ट सड़क के रूप में यशवंत निवास रोड को तैयार किया गया था। इसके निर्माण के दौरान कालम डालकर सड़क बनाई गई थी। यही वजह है कि सड़क के एक ओर खड़े होने पर जब दूसरी ओर से बस गुजरती है तो कंपन महसूस होती है। इंदौर में रोड निर्माण का यह एक तरह का अलग ही प्रयोग था। उन्होंने बताया कि कृष्णपुरा क्षत्रियों पर जो सैनिकों की प्रतिमाएं बनी हुई है, उनमें एक प्रतिमा अंग्रेजी पोशाक पहने सैनिक की है। इसमें अंग्रेज सिपाही को सैल्यूट करते हुए दिखाया गया है। होलकर काल में आमतौर पर जो प्रतिमाएं बनाई जाती थीं, उनमें चोबदार की वेशभूषा वाले सैनिकों की पोशाक होती थी जिनके हाथ में राजदंड होता था। कृष्णपुरा छत्री पर बनी अंग्रेज पोशाक वाले सैनिक की प्रतिमा से यह स्पष्ट होता है कि उस समय अंग्रेजों का शासन चालू हो गया था जिसका असर मूर्तिकला पर भी दिखाई दे रहा था।

Posted By: Hemraj Yadav

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