इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अश्विन मास में शरद पूर्णिमा की रात कई मायने में महत्वपूर्ण होती है। इसे शरद ऋतु की शुरुआत भी माना जाता है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर्व दो दिन मनाया जाएगा। खास बात यह है यह इन दोनों ही दिन खास योग बन रहे हैं जो धार्मिक दृष्टि से बेहतर माने जा रहे हैं। इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर्व दो दिन सर्वार्थ सिद्धि योग एवं यायी जायद योग में मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत शुक्रवार शाम को होगी और समापन शनिवार की रात को होगा। निर्णय सागर पंचांग में शुक्रवार को शाम 5.45 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। वहीं उज्जैन के दो प्रमुख पंचांगों में शरद पूर्णिमा शनिवार को मनाने का उल्लेख है। इन दोनों पंचांगों में पूर्णिमा तिथि 30 अक्टूबर को रात 8ः06 बजे शुरू होगी, जो 31 अक्टूबर की रात 10ः01 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि जब प्रदोष काल में होती है, तब उस दिन पूर्णिमा व्रत एवं पर्व मनाया जाता है। शुक्रवार को कोजागिरी व्रत और शनिवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं महर्षि पाराशर जयंती भी है।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है। इस अमृत को ग्रहण करने के लिए मठ-मंदिरों के अलावा घरों में भी खीर बनाई जाती है और फिर उसका वितरण होता है। मालवीय नगर स्थित बर्फानीधाम में शरद पूर्णिमा पर शुक्रवार को औषधियुक्त खीर का वितरण नहीं होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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