इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भगवान गणेश को तिल चतुर्थी पर तिल के लडड्ओं के भोग अर्पित करने के बाद अब भगवान विष्णु का तिल से पूजन करने से पापों से मुक्ति मिलेगी। अवसर 28 जनवरी को षटतिला एकादशी पर होगा। इस अवसर पर एकादशी व्रत रखकर तिल से स्नान-पूजन के साथ सेवन करने से व्रतधारी को मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। ज्योतिर्विदों के मुताबिक माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 27 जनवरी गुरुवार को रात 2.16 बजे से 28 जनवरी शुक्रवार को रात 11.35 बजे तक रहेगी। एकादशी का पारणा 29 जनवरी को सुबह 7.11 से 9.20 बजे तक किया जा सकता है।

ज्योतिर्विद् आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार माघ मास की कृष्ण पक्ष षटतिला एकादशी का विशेष महत्व है।बताया जाता है कि जितनी तिल दान करो उतने हजार वर्ष स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। भगवान विष्णु के पूजन में तिल का प्रयोग करना जरूरी होता है। इसके कुछ खास नियम हैं। इसका पालन करने से मान्यता है कि व्रतधारी को अपने जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत के एक दिन पहले ही तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए। मांसाहार के साथ लहसुन और प्याज की बनी वस्तुओं का प्रयोग भी वर्जित है। सबसे पहले तिल का उबटन लगाकर स्नान के जल में तिल डालकर स्नान करना चाहिए। भगवान विष्णु का पूजन तिल से कर उन्हें तिल अर्पित करना चाहिए।

इस बार साथ प्राप्त होगी लक्ष्मी- विष्णु की प्रसन्नता

पूजन में तिल के उपयोग के साथ ही व्रत जो भी फलहार व खाद्य पदार्थ व जल आदि ग्रहण करते हैं उसमें तिल का उपयोग करना चाहिए। इस दिन हवन भी तिल के साथ करने से तिल का दान भी हितकर माना जाता है। इस दिन व्रत की कथा का श्रवण भी करना चाहिए। इस बार व्रत माता लक्ष्मी के प्रिय दिन शुक्रवार को आने से माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होगी। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रसन्नता एक दिन ही साथ मिलेगी।

Posted By: Sameer Deshpande

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