Shiv Mahapuran In Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शिव महापुराण की कथा अविरल भक्ति और मुक्ति की कथा है। हर सांस में शिव समाया है। इसलिए जिस दिन सांस चलना बंद, उस दिन शरीर खत्म हो जाता है। आज कई लोग सड़क पर बैठे हैं। उन्हें वहां कथा का लाभ मिल रहा है। विश्वास जहां होता है, वहीं भक्ति का निवास होता है। रामचरितमानस में तुलसीदासजी ने भी कहा है कि शिवजी ही विश्वास का प्रतीक हैं। विश्वास के बगैर भक्ति को पाना असंभव है। विश्वास की प्रबलता से भक्ति का संचार होता है। भक्ति ही शिव और शक्ति का दर्शन कराती है।

यह बात कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने इंदौर में शनिवार को सात दिनी शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कही। वे दलालबाग किला मैदान रोड पर हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूरज जब ढलता है तो हम अपने घर की लाइट चालू कर लेते हैं ताकि प्रकाश बना रहे। उसी तरह से जब जीवन ढलने लगे तो उसके पहले हमें भक्ति का बल बढ़ा लेना चाहिए। भजन करना शुरू कर देना चाहिए, तभी जीवन सार्थक होगा।

सबसे बड़ा आश्रम गृहस्थाश्रम - पं. मिश्रा ने कहा- देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा हर व्यक्ति को भगवान शिव की भक्ति का संदेश देती है। जब भक्ति का बल बढ़ता है तो जीवन में सुख का बल बढ़ जाता है। जीवन में सबसे बड़ा आश्रम गृहस्थाश्रम है। हम घर छोड़कर कहीं भी चले जाएं तो भजन नहीं होगा। भक्ति अविरल होना चाहिए। हमें शिव तत्व को जानने की जिज्ञासा होना चाहिए। भक्ति के लिए ज्ञानी, तपस्वी, संत बनने की जरूरत नहीं है, केवल शिव का भक्त बनो। कथा 30 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से होगी।

गुरु स्वामी बालमुकुंददास की 49वीं पुण्यतिथि मनाई - पंचकुइया स्थित राम मंदिर आश्रम में गुरु स्वामी बालमुकुंददास महाराज की 49वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इसमें कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा शामिल हुए। उन्होंने भगवान टीकमजी का दर्शन-पूजन किया। महामंडलेश्वर लक्ष्मणदास महाराज ने पं. मिश्रा का सम्मान किया। इस अवसर पर नारायण अग्रवाल, पीडी गर्ग, महामंडलेश्वर रामगोपालदास महाराज, महंत गिरिजानंदनदास महाराज आदि मौजूद थे।

Posted By: Hemraj Yadav

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