Shiv Mahapuran In Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक पांच वर्षीय बच्चे के विश्वास का प्रतिफल देने के लिए भगवान शिव उज्जैन में महाकाल के रूप में प्रकट हुए। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां भगवान के नयन, चेहरा, मूंछ बनाई जाती है। देश में फिल्म और नाटक ने लोगों को मंदिर से दूर कर दिया था, लेकिन जब से शिव महापुराण कथा शुरू हुई है, तब से बड़ी संख्या में लोग शिव मंदिर जाने लगे हैं। हर व्यक्ति भगवान शिव को एक लोटा जल और एक बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए पूरे मनोभाव से जाता है। यह बात कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने सोमवार को इंदौर के दलालबाग किला मैदान में कही। वे सात दिनी शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब लोगों का मनोभाव बदलने लगा है। कोरोना संक्रमण काल आने से पहले व्यक्ति पूरे साल में एक बार, लेकिन अब साल में दो बार या उससे ज्यादा बार शिवजी का अभिषेक करने लगे हैं। कथा सुनने दूसरे शहर से आए लोग कोई साधारण नहीं हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें शिव तत्व प्राप्त हुआ है। शिव की कृपा प्राप्त हुई है। उस कृपा के प्राप्त होने के कारण अब ये पूरी कथा यहां रुककर भगवान शिव को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं। जीवन का बुरा समय चौराहे के रेड सिग्नल की तरह - पं. मिश्रा ने कहा कि पारिवारिक विवाद घर घर की कहानी है। इससे बचने का सीधा समाधान सास और बहू के संयम में छिपा हुआ है। जीवन का बुरा समय चौराहे के रेड सिग्नल की तरह होता है। जिस तरह हम रेड सिग्नल पर अपनी गाड़ी रोक लेते हैं, उसी तरह से बुरे समय में भी यदि हम शांति रख लेंगे तो वह समय निकल जाएगा और ग्रीन सिग्नल में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। कथा 30 नवंबर तक दोपहर 2 बजे से होगी।

Posted By: Hemraj Yadav

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