Shivmahapuran Katha in Indore : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शिव का अर्थ ही कल्याण है। प्राणी मात्र के लिए कल्याण और मुक्ति की प्राप्ति शिव पुराण के श्रवण से ही संभव है। समाज में समता एवं त्याग की भावना तभी बढ़ेगी, जब हम शिव पुराण जैसे ग्रंथों के संदेशों को आत्मसात करेंगे। शिव पुराण के श्रवण से भक्ति, भक्ति से प्रेम, प्रेम से सद्भाव और सद्भाव से भेदभाव मुक्त समाज का सृजन होता है। अज्ञान, अहंकार और समाज में व्याप्त पाश्विक प्रवृत्तियों का नाश करने के लिए शिव पुराण जैसे ग्रंथों का मनन और मंथन जरूरी है। सत्य की राह पर चलकर शिव की तरह प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठता का लक्ष्य ही सत्यम, शिवम, सुंदरम के भाव को चरितार्थ करेगा।

यह बात नरसिंहपुर के आचार्य पं. अशोक शास्त्री ने रोबोट चौराहा स्थित पुष्प दंतेश्वर महादेव मंदिर गणेश नगर में कही। वे श्रावण मास के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय महाशिवपुराण कथा के समापन प्रसंग पर भक्तों को संबोधित कर रहे थे। आचार्यश्री ने नर्मदेश्वर एवं दान की महिमा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। समापन अवसर पर भगवान शिव का जीवंत दरबार सजाकर दीपोत्सव भी मनाया गया। सैकड़ों भक्तों ने आरती में झिलमिलाते दीपों को लेकर भगवान शिव की आराधना स्वरूप सबके मंगल एवं कल्याण की कामना की।

घर परिवार को संभालना शिव परिवार से सीखें - आचार्य पं. शास्त्री ने कहा कि शिव पुराण में प्राणी मात्र के अभ्युदय का भाव है। समाज में अनेक तरह की विसंगतियां कलियुग के प्रभाव के कारण बढ़ती जा रही है। हमारी नई पौध इन विकृतियों में उलझकर संस्कार और संस्कृति से विमुख हो रही है। घर और परिवार बिखरने लगे हैं। घर और परिवार कैसे संभाले जाते हैं, यह शिव परिवार से सीखना चाहिए, जहां एक दूसरे के कट्टर दुश्मन भी एक साथ रहते हैं। भगवान शिव गले में सर्प धारण किए हुए हैं, जिनका दुश्मन कार्तिकेय की सवारी मोर है। गणेशजी की सवारी चूहा है जो सांप के निशाने पर रहता है, जबकि मोर के निशाने पर सर्प रहता है। विपरीत स्वभाव के लोगों को जोड़कर रखने का संदेश भगवान शिव ही देते हैं। अपने घर-परिवार को बचाने के लिए हमें अपने बच्चों को धर्मग्रंथों के माध्यम से सेवा, दया, करुणा और निर्भयता जैसे गुणों की शिक्षा देना होगी। शिव पुराण भक्ति और मुक्ति का ग्रंथ है। सत्य की राह पर चलकर शिव की तरह कल्याणकारी और प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठता का लक्ष्य ही सत्यम, शिवम, सुंदरम के सूत्र वाक्य को चरितार्थ बनाएगा।

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