Shraddhanand Bal Ashram Indore: उदय प्रताप सिंह, इंदौर (नईदुनिया)। लॉकडाउन के पहले 13 वर्षीय एक बालक को सिगरेट व बीड़ी के नशे की आदत थी। वह रेलवे चाइल्ड लाइन व बाल कल्याण समिति के माध्यम से आश्रय गृह पहुंचा। यहां छह माह रहने के दौरान बालक ने न सिर्फ नशे की आदत छोड़ी, अपितु पढ़ना भी सीख लिया। उसने श्रद्धानंद बाल आश्रम में रहकर साड़ियों की चिंदी से आसन, दरी, टाटपट्टी व बैग बनाना सीखा। यह बालक 14 सितंबर को अपने घर लौटा और अब ये वहां अपने हुनर का रोजगार के रूप में इस्तेमाल करेगा।

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष माया पांडे के अनुसार जब यह बालक रेलवे चाइल्ड लाइन को मिला था तो यह अपनी मां व पिता के साथ नानी के घर नहीं जाना चाहता और स्टेशन से यह भाग निकला था। रेलवे चाइल्ड लाइन के माध्यम से हमारे पास आया था। बालक के पिता निजी संस्थान में सफाई कर्मचारी हैं। उनके पांच बच्चे हैं लेकिन कोई भी स्कूल नहीं गया। उनके पास बालक के पहचान संबंधी कोई दस्तावेज भी नहीं थे। पांच माह बाद वे शपथ पत्र लेकर आए। इसके बाद बालक को उसके पिता को सौंपा गया।

इस बीच बालक ने दरी और बैग बनाना व पढ़ना-लिखना सीखा है। बालक ने अच्छे संस्कार और बड़ों का अभिवादन करना भी सीखा। बालक ने कहा कि मैं घर पर सीखी गई चीजें को बनाकर बेचूंगा। इस तरह बालक को अब रोजगार भी मिल जाएगा। श्रद्धानंद बाल आश्रम में लॉकडाउन पीरियड में आठ बच्चों को बैग, दरी व आसन का पूर्ण प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 25 बच्चे अब भी यहां पर प्रशिक्षण ले रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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