रामकृष्ण मुले, इंदौर। देवशयनी एकादशी 10 जुलाई से 4 नवंबर देवप्रबोधनी एकादशी तक चातुर्मास के 117 दिन श्रीहरि विष्णु योग निद्रा में रहेंगे, लेकिन मांगलिक कार्यों पर विराम 133 दिन रहेगा। इस दौरान रक्षा बंधन, नाग पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका तीज, गणेशोत्सव, सोलह दिनी श्राद्ध पक्ष, शारदीय नवरात्र सहित अधिकांश प्रमुख तीज-त्योहार आएंगे। 14 जुलाई से श्रावण माह की शुरुआत के साथ महादेव समूची सृष्टि के काज संभालेंगे। इस अवसर पर संतों के सान्निध्य में व्रत-उपवास के जरिए आराध्य की साधना होगी।

ज्योर्तिविद् विनायक त्रिवेदी के मुताबिक चातुर्मास भगवान विष्णु के शयनकाल का समय है। शास्त्रों में इस दौरान विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश सहित सभी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। साधु-संत भ्रमण न करते हुए एक स्थान पर रहकर तप-साधना करते हैं।

योग निद्रा में भगवान के रहने की अवधि देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक रहती है। आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के मुताबिक सामान्यत: चातुर्मास चार माह का होता है लेकिन इसके साथ जब अधिक मास जुड़ जाता है तो इसकी अवधि एक माह बढ़ जाती है। इसके चलते 2020 में चातुर्मास 147 दिन का था, जबकि 2021 में 119 व और इस वर्ष 2022 में 117 दिन का है। चातुर्मास के दौरान प्रत्येक तीन साल में एक बार अधिक मास आता है।

विवाह के अब सिर्फ तीन मुहूर्त शेष

विवाह के लिए अब 5, 6 व 8 जुलाई के शुभ मुहूर्त शेष हैं। इसके बाद 9 जुलाई से 18 नवंबर तक 133 दिन विवाह के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इसकी वजह चातुर्मास के साथ दांपत्य सुख को प्रदान करने वाले शुक्र के तारे का अस्त होना होगा।

ज्योतिर्विद् नीलकंठ बड़वे गुरुजी बताते हैं कि देव प्रबोधिनी एकादशी के बाद भी वैवाहिक आयोजन की शुरुआत नहीं होगी। इसकी वजह विवाह के लिए आवश्यक शुक्र का तारा अस्त होना रहेगा। शुक्र का तारा 30 सितंबर से 18 नवंबर कुल 49 दिन अस्त रहेगा। इसके बाद विवाह मुहूर्त 19 नवंबर से हैं। नवंबर में छह और दिसंबर में पांच विवाह के मुहूर्त रहेंगे।

कब कौन से तीज-त्योहार

- 13 जुलाई को गुरु पूर्णिमा (वेदव्यास जयंती)

- 18 जुलाई को श्रावण का पहला सोमवार।

- 25 जुलाई को श्रावण का दूसरा सोमवार।

- 28 जुलाई को हरियाली अमावस्या।

- 31 जुलाई को हरियाली तीज।

- 1 अगस्त को श्रावण सोमवार।

- 2 अगस्त को नाग पंचमी।

- 8 अगस्त को श्रावण सोमवार।

- 11 अगस्त को रक्षाबंधन।

- 18 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी।

- 20 अगस्त को गोगा नवमी।

- 30 अगस्त को हरितालिका तीज।

- 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी।

- 1 सितंबर को ऋषि पंचमी।

- 9 सितंबर को अनंत चतुर्दशी।

- 10 सितंबर से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ।

- 25 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या।

- 26 सितंबर से शारदीय नवरात्र।

- 4 अक्टूबर को महानवमी।

- 5 अक्टूबर को दशहरा।

- 9 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा।

- 22 अक्टूबर को धनतेरस।

- 23 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी।

- 24 अक्टूबर को दीपावली।

- 26 को गोवर्धन पूजा और भाई-दूज।

- 5 अक्टूबर को विजयादशमी

- 4 नवंबर को देवप्रबोधिनी एकादशी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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