इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज के दो आचार्यों का महामिलन सोमवार को रेसकोर्स रोड स्थित बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में हुआ। एक मंच पर आए दोनों संतों के इस मिलन की घड़ी के साक्षी बनने के लिए दोनों समाज के समाजजन बड़ी संख्या में उमड़े। जैसे ही आचार्य विशुद्धसागर से आचार्य शिवमुनि मिले आयोजन स्थल जयघोष से गूंज उठा।

दोनों संघों में कुल चालीस संत की मौजूदगी में महावीर की महिमा के प्रचार एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करने एवं समाज को महावीर के संदेशों के अनुरूप संचालित करने पर चर्चा हुई। आचार्य शिवमुनि ने कहा कि समाज भले ही अलग है, लेकिन हम दोनों ही महावीर के दूत हैं। महावीर की साधना, उनके ध्यान, सहनशीलता, अहिंसा भाव व आत्म साधना जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक मंच पर विराजित हुए हैं।

संतों के जीवन की सफलता मैं तभी मानूंगा जब जन-जन हमारी बातों के आधार पर चले। आचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि भगवान महावीर ने तो सिर्फ जैन धर्म प्रतिपादित किया। उन्होने कोई पंथ नहीं बनाए। विश्व को गणित व व्याकरण जैन दर्शन ने ही दिए हैं।

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