इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने मनमाने निर्णयों से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाती दिख रही है। कंपनी ने अगले दो महीनों में इंदौर समेत सभी जिला मुख्यालयों पर बिजली के बिल वितरण करने का सिस्टम बंद करने की घोषणा कर दी है। पेपरलेस के नाम पर मोबाइल पर बिल पहुंचाने की बात कही जा रही है। बिजली कंपनी के इंदौर शहर में ही करीब सात लाख बिजली उपभोक्ता हैं। कंपनी के निर्णय से तकनीकी से अछूते उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती दिख रही है।

बिजली कंपनी अब तक हर उपभोक्ता के घर बिल पहुंचाती है। बीते वर्षों में बिजली कंपनी में कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में मीटर रीडिंग और बिल बांटने का काम ठेके पर रखे गए कर्मचारी कर रहे हैं। विद्युत नियामक आयोग का निर्देश है कि उपभोक्ताओं को बिल मिलने से लेकर जमा होने तक 15 दिन का समय मिलना चाहिए। समय पर बिल बांटने में असफल हो रही बिजली कंपनी ने इसका तोड़ निकालते हुए बिल ही बंद करने की घोषणा कर दी। कंपनी ने ऐलान किया है कि उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बिजली बिल पहुंचेंगे। इससे पहले बिजली कंपनी अपनी सुविधा के लिए जोन स्तर पर बिलों में त्रुटि सुधार भी बंद कर चुकी है।

परेशानी बढ़ाने वाली मनमानी - बिजली कंपनी के पूर्व अधीक्षण यंत्री और तमाम बड़े बिजली उपभोक्ताओं की ओर से नियामक आयोग में वकील की भूमिका निभा रहे आरके सोमानी के अनुसार बिजली हर व्यक्ति की जरूरत है। गरीब अमीर, साक्षर और निरक्षर हर उपभोक्ता कंपनी का ग्राहक है। ऐसे में कंपनी सभी से यह अपेक्षा करे कि वे स्मार्ट फोन रखें और इंटरनेट का उपयोग करें, ठीक नहीं है। ऐसे उपभोक्ता जो निम्नवर्ग से हैं या बुजुर्ग हैं जो तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं, उन पर भी मोबाइल बिल लादना मनमानी है। जबकि बिजली बिल एक सरकारी दस्तावेज की तरह पते के प्रमाण के रूप में भी उपयोग किया जाता है। बिजली कंपनी यदि पेपरलेस बिल सिस्टम लागू करना चाहती है तो उसे वैकल्पिक करना चाहिए। लेकिन सिर्फ अपने संसाधन और समय बचाने के लिए सभी पर पेपरलेस का बंधन लादा जा रहा है। तमाम उपभोक्ता जो अभी बिल को देखकर समझ पाते हैं और गलती पकड़कर सुधरवाने के लिए कंपनी तक पहुंच पाते हैं, पेपरलेस बिल होने से वह सिलसिला भी रुक जाएगा।

शुरुआत में मदद करेंगे - बिजली कंपनी अपने निर्णय का बचाव करते हुए दलील दे रही है कि आज के युग में स्मार्ट फोन और इंटरनेट से कोई दूर नहीं है। कुछ ऐसे उपभोक्ता जो स्मार्ट फोन उपयोग नहीं करते उनके लिए शुरुआती महीनों में मदद उपलब्ध रहेगी। बिजली कंपनी के पीआरओ अवधेश शर्मा कहते हैं मीटर रीडर शुरुआती महीनों में उनके घर पहुंचकर उन्हें नया सिस्टम समझाएगा। ऐसे उपभोक्ता चाहेंगे तो उन्हें जोन से बिलों की प्रिंट निकल सकेगी। इससे उपभोक्ता को लाभ होगा कि उन्हें बिल जमा करने के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा। वैसे भी अब भी इंदौर जैसे शहर में बड़ा हिस्सा आनलाइन भुगतान कर ही रहा है।

साफ्टवेयर पर खर्च - बिजली कंपनी के सूत्रों के अनुसार बिजली कंपनी एक ओर तो संसाधान और समय बचाने की बात कर रही है वहीं पेपरलेस बिल के लिए भी मोटा खर्च करने की तैयारी कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार पेपरलेस बिल के साफ्टवेयर के लिए महंगी कीमत चुकाई जा रही है। किसी अधिकारी के कहने पर एक खास कंपनी को पेपरलेस बिल के लिए सिस्टम बनाने का काम सौंपा गया है। असल में पूरे निर्णय के पीछे यही बात जिम्मेदार है।

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