Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लिव इन रिलेशनशिप की वजह से आ रही सामाजिक विकृतियों और बढ़ते अपराधों पर रोक लगाने के लिए लिव इन रिलेशनशिप के संबंध में आवश्यक कानून बनाने की मांग करते हुए इंदौर की संस्था ने इस संबंध में ड्राफ्ट तैयार कर केंद्र शासन को भेजा है। इसमें कहा है कि लिव इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके उद्देश्य स्पष्ट किए जाना चाहिए। इस प्रकार कानूनी परिवर्तन किए जाते हैं तो लिव इन रिलेशन के नाम पर आए दिन हो रहे अपराधों और विभिन्न सामाजिक समस्याओं का निदान हो सकेगा।

यह ड्राफ्ट संस्था न्यायाश्रय ने तैयार किया है। संस्था के पंकज वाधवानी ने बताया कि सामाजिक मान्यताओं एवं सामाजिक ताने बाने की रक्षा के लिए ही विवाह संस्था का जन्म हुआ है। आजादी के नाम और जीवन जीने की स्वतंत्रता के नाम पर जिस प्रकार से लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी दर्जा दिया गया है। उससे उत्पन्न होने वाली विभिन्न कुरितियां हमें फिर से उसी आदिम युग की ओर ले जा रही हैं, जहां पर विभत्स अपराध हुआ करते थे।

लिव इन रिलेशनशिप की वजह से परिवार और समाज का बहिष्कार हो जाता है। इसके अलावा साथ रहने वालों में एक दूसरे के प्रति किसी प्रकार का सामाजिक और परिवारिक हस्तक्षेप एवं दबाव न होने की वजह से आपस में जुड़ाव नहीं होता। इसकी वजह से लिव-इन में रहने वाले और अधिक तनावपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं और इसका परिणाम हत्या और आत्महत्या के रूप में सामने आता है।

तैयार किए गए ड्राफ्ट की प्रमुख बातें -

-लिव इन रिलेशन का हो रजिस्ट्रेशन

ड्राफ्ट में कहा गया है कि लिव इन रिलेशनशिप में कई व्यक्ति इसलिए रहते हैं क्योंकि वे अपने एकाकी जीवन से परेशान हो गए हैं और उन्हें किसी पार्टनर की आवश्यकता है जो उनके सुख दुख में उनका साथ दें। वर्तमान में युवा पीढ़ी लिव इन रिलेशनशिप को मात्र शारीरिक संबंध बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस संबंध का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।

लिव इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों की वैधानिकता

ड्राफ्ट में यह भी कहा है कि व्यवहारिक रूप से यही देखा जाता है कि ऐसे संबंधों से उत्पन्न हुए बच्चों को समाज में तिरस्कार मिलता है। इन बच्चों को शैक्षणिक संस्थाओं में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनके साथ पारिवारिक संपत्ति में भेदभाव होता है। अगर लिव इन रिलेशनशिप के संबंध में आवश्यक कानूनी परिवर्तन किए जाते हैं तो बच्चों को होने वाली समस्याओं से भी निजात मिल सकेगी।

Posted By: Sameer Deshpande

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