इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News। सृष्टि के रंगमंच पर अनेक आत्मा आती है पर कुछ अपने कार्य एवं उज्जवल चरित्र से इतिहास में अमर स्थान प्राप्त कर लेती है। ऐसी विभूतियां युगों तक सर्व के मानस पटल पर अंकित हो जीवित रहती है । उनका जीवन ही जगत कल्याण के लिये समर्पित होता है। ऐसी ही विलक्षण प्रतिभा की धनी ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती थी। वे 17 वर्ष की आयु में संस्था के संपर्क में आई और अपने ज्ञानबल, योगबल, तपोबल से ईश्वरीय ज्ञान को जीवन में आत्मसात कर सर्व की अलौकिक पालना करने वाली मां जगदम्बा कहलाई।

यह बात मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की पुण्य स्मृति दिवस पर इंदौर जोन की मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कही। वे ओमप्रकाश भाईजी सभागृह ज्ञान शिखर में आयोजित कार्यक्रम संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती ने ब्रह्मामुख कमल से प्रवाहित ज्ञान को सूक्ष्मता से समझकर यथार्थ के धरातल पर परखकर दृढ़तापूर्वक कर्मों में ढाला और लाखों आत्माओं के कल्याण के निमित्त बनी। मातेश्वरी के अंदर आध्यात्मिक ज्ञान,योग और पवित्रता इतनी प्रचंड शक्ति थी कि उनकी एक दृष्टि मात्र से ही व्यक्ति अपने अंदर एक अलौकिक परिवर्तन महसूस करता और जीवन की बुराईयों को सहज ही छोड़ देते थे ।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने मां जगदम्बा की शिक्षाओं का स्मरण करते भोग स्वीकार कराया एवं अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। माउण्ट आबू की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने नारी शक्ति की प्रेरणास्रोत मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती विषय पर अपने विचार रखे एवं विशेष योग की अनुभूति कराई। साथ ही ब्रह्माकुमारीज के सभी सेवाकेन्द्रों पर विशेष मौन साधना, योग तपस्या के कार्यक्रम हुए।

Posted By: Sameer Deshpande

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