Indore Dr. Jitendra Vyas Column: डा. जितेंद्र व्यास, इंदौर, नईदुनिया। इन दिनों भाजपा पूरी ताकत से आदिवासी समुदाय के नायकों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के साथ ही उनके योगदान को भी याद कर रही है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र के आदिवासी नायक और स्वतंत्रता सेनानी टंट्या मामा के लिए जिस वैभव के साथ जिलों में यात्रा निकाली जा रही है, उसने कांग्रेस के साथ जयस की भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भाजपा के इस पैंतरे का जवाब कैसे दें। कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को फिर पाना चाहती है तो जयस अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इधर टंट्या मामा के प्रति अगाध श्रद्धा व स्नेह प्रदर्शित करने के लिए भाजपा ने अपने 'मामा' को मैदान में उतार दिया है। इंदौर में होने वाले कार्यक्रम की व्यवस्था में जुटे अफसरों के बीच चर्चा में इस जुमले के बाद जमकर ठहाके लगे। जुमला था-'ये प्यार तो किसी और का है, लेकिन उसे चाहता कोई और है।

जो समझते नहीं थे कुछ, वो भी समझदार हो गए

इंदौर नगर निगम की राजनीति इन दिनों जिस तरह कदम जमा-जमा कर आगे बढ़ रही है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों के गणित भी गड़बड़ा दिए हैं। दरअसल, भाजपा की बीती तीन परिषदों में गुटीय घमासान से संगठन पदाधिकारियों के साथ-साथ निगम के अधिकारी भी परेशान थे। इस बार निगम की कमान युवा हाथों में जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि अलग-अलग गुट के इन क्षत्रपों को साधना टेढ़ी खीर होगा। ये कार्यकाल पिछले कार्यकालों से ज्यादा हंगामेदार होगा। लेकिन हो इससे ठीक उलट रहा है। सभी गुट अपने काम लेकर निगम पहुंच रहे हैं और काम हो रहे हैं। अफसरों को निर्देश हैं कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी न हो। अब देखना यह है कि अब तक नहीं समझने वाले इस फार्मूले से समझते हैं या फिर तलवारें म्यान से बाहर आएंगी।

फोटो वाला 'जोश"है. . . इतना ही साथ निभाता है

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा मप्र में आने से पहले कांग्रेसियों में जो नजर आ रहा था, वह जोश यात्रा के इंदौर पहुंचते ही थोड़ी-थोड़ी दूर पर बदलता जा रहा था। यात्रा इंदौर पहुंचने पर जब राहुल गांधी ने पैदल चलना शुरू किया तो इंदौरी नेताओं ने शुरू में खूब जोश दिखाया, लेकिन यात्रा जैसे-जैसे अगले चरणों में पहुंचती गई, पुराने चेहरे गायब होकर नए चेहरे जुड़ते गए। दरअसल, इंदौरी नेताओं ने यात्रा के पहले ही ये बात समझ ली थी कि फोटो और फुटेज सुबह 6 से 9 बजे के बीच ही सबसे ज्यादा बनते हैं। इसलिए इस दौरान सबसे ज्यादा सक्रियता भी नेताओं ने दिखाई। बाद में जैसे ही अपने क्षेत्र से यात्रा दूसरे क्षेत्र में पहुंची, धीरे से यात्रा से दूर होकर वाहन में बैठ गए। यात्रा के साथ शुरू से जुड़े दिल्ली के एक नेता की टिप्पणी थी ये फोटो वाला जोश है बस इतनी देर ही साथ रहता है।

यात्रा तो निकल गई. . . दिल फिर भी नहीं जुड़ पाए

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए आरंभ से ही कहा जा रहा है कि यह भारत के साथ-साथ कांग्रेस को जोड़ने के लिए है, लेकिन इंदौर से यात्रा के निकलने के बाद भी कांग्रेसियों के दिल जुड़ते नजर नहीं आए। दरअसल हुआ यूं है कि विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग गुटों के नेता पूरे समय यह जताने-बताने का प्रयास करते रहे कि यात्रा के लिए सबसे ज्यादा मेहनत उन्होंने ही की है। कुछ ने मौका मिलते ही केंद्रीय नेताओं के समक्ष अपने प्रतिस्पर्धी नेताओं को नीचा दिखाने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा। विधानसभा एक, तीन और पांच में कई जगह ये दृश्य नजर आए। यात्रा जब ग्रामीण क्षेत्र में थी, तब वरिष्ठ नेताओं के ये संवाद भी सुने गए कि 'अब आप लोग ही कर लो, मैं तो घर निकल रहा हूं'। पदाधिकारियों को पूरा माजरा समझ भी आ रहा था, लेकिन स्थिति न बिगड़े इसलिए वे चुप्पी साधे आगे बढ़ते रहे।

Posted By: Sameer Deshpande

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close