इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News। संक्रमण के इस दौर में हर ओर नकारात्मकता बढ़ती जा रही है। संक्रमित होते लोग और उससे होने वाली मौतों के आंकड़ों से लोगों में भय बढ़ता जा रहा है जिसका परिणाम यह हो रहा है कि स्वस्थ व्यक्ति के मन पर भी नकारात्मक विचार हावी होकर उसे भी शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार कर रह हैं। डाक्टर्स की मानें तो नकारात्मक विचार हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव तो डालते ही हैं साथ ही स्वस्थ होने की गति के बाधक भी बनते हैं, जबकि खुश रहना, डर से दूर रहना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का सोचने वालों का स्वास्थ्य अपेक्षाकृत बेहतर होता है। मनोरोग विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ होने में 50 प्रतिशत योगदान हमारी इच्छाशक्ति का होता है।

नकारात्कता से दूर रहें

मनोरोग विशेषज्ञ डा. पवन राठी के अनुसार कुछ लोग डर के कारण बीमार हो रहे हैं और कुछ बीमारी की वजह से डर से नाता जोड़ चुके हैं। दोनों ही परिस्थिति में नुकसान आपका ही है। डर या नकारात्मकता से रोग प्रतिरोधक क्षमता तो कम होती ही है साथ ही स्वस्थ होने की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है, जबकि खुश रहने से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब भी समस्या आए तो सोचें कि इससे पहले भी समस्याएं आईं थी और आपने उनका कैसे सामना किया था। इस तरह आप सकारात्मकता की तरफ मुड़ेंगे। हमारे स्वस्थ होने में 50 प्रतिशत योगदान हमारी दृढ़इच्छा शक्ति का होता है जो कि सकारात्मकता से मिलती है।

दूसरों की मदद से मिलती है खुशी

मनोरोग विशेषज्ञ डा. वैभव चतुर्वेदी के अनुसार सकारात्मक रहना स्वस्थ रहने या होने की पहली शर्त है। एक कागज पर नकारात्मक और सकारात्मक दोनों परिणाम लिखें। आप पाएंगे कि सकारात्मक काम ज्यादा हुए। यह सोचें कि बुरा वक्त हमेशा नहीं रहता पहले भी महामारियां आई और चली गई थीं। घर में बना अच्छा भोजन करें क्योंकि इससे खुशी मिलती है। इस वक्त दूसरों की मदद करें क्योंकि मदद करने से जो खुशी मिलती है उससे नकारात्मकता दूर होती है और यूट्यूब आदि पर हंसाने वाले प्रोग्राम देखें।

परिस्थिति को स्वीकार कर उसका सामना करें

थाट टेक्नोलाजिस्ट अर्चना शर्मा के अनुसार इस नकारात्मक माहौल से निकलने के लिए हमें सबसे पहले तो उन साधनों पर रोग लगानी होगी जहां से नकारात्मक जानकारी मिल रही हैं। संक्रमण है इस बात को हमें स्वीकार कर उसका सामना किस तरह से करना है इस पर सोचना होगा। परिस्थिति को अपनाकर ही उसका सामना किया जा सकता है। आपदा में अवसर तलाशने का यह मौका है और आप इसके अनुरूप ही काम करें। खुद को सकारात्मक रखने के लिए अच्छी किताबें पढ़ें या आडियो बुक सुनें।

Posted By: Sameer Deshpande

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