Swachh Survekshan 2022 : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वच्छता में छह बार प्रथम स्थान पर आना निस्संदेह बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह स्मरण रखना होगा कि शिखर सदैव नुकीले होते हैं। वहां पहुंचना भले ही कठिन हो, किंतु वहां टिके रहना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होता है। यह हमारे सामने चुनौती रहेगी कि हम जनता की इसी सामूहिक संकल्पशक्ति को एकीकृत रखें और मिलकर स्वच्छता बनाए रखें। जल, थल, वायु प्रदूषण से मुक्ति के लिए कदम उठाते रहें। सातवीं बार नंबर वन आने के लिए हमें कई कोशिशें करते रहना होगा।

ये बातें आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहीं। प्रो. राय ने कहा कि निरंतर विकसित होते शहर में जनसंख्या भी बढ़ी है और उच्च शिक्षण संस्थानों और उद्योगों की स्थापना से बाहर से आने वाले युवाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। जाहिर है कि नगर के सभी संसाधनों के व्यय में भी वृद्धि देखने को मिली है और नतीजतन अपशिष्ट भी अधिक उत्पन्न होने की आशंका रहेगी। तेजी से बढ़ती गाड़ियों कि संख्या से स्वच्छ वायु पर प्रभाव पड़ सकता है। स्वच्छ पानी की आपूर्ति के लिए भी विशेष तंत्र बनाने की आवश्यकता पड़ेगी। इन सभी के लिए हम सभी को एक साथ समाधान खोजने होंगे और नियमावली और तंत्र स्थापित करने में सहयोग देना होगा।

मिलकर काम करने की क्षमता - प्रो. राय ने कहा कि इंदौर में जनता का सहयोग उत्साह और काम करने की क्षमता प्रेरणास्रोत है। विश्व के किसी भी देश में इस प्रकार का स्वच्छता ट्रेंड देखने को शायद ही मिला हो। मिलकर काम करने की क्षमता और परमार्थ के लिए तन, मन और धन समर्पित कर देने की शक्ति इंदौर को विशेष बनाती है। मुझे लगता है कि यही भविष्य में भी सभी के लिए उदाहरण बनती रहेगी और हम सभी स्वच्छता के लिए इसी प्रकार दृढ़ संकल्पित रहेंगे।

शिद्दत और संकल्पशक्ति का परिणाम - प्रो. राय ने कहा कि स्वच्छता के मामले में पूरे देश में लगातार छह बार सर्वोच्च स्थान पर स्थापित हो जाना भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी शहर के लिए प्रेरणा का विषय है। मैं यह मानता हूं कि इंदौर में जो भी कार्य हुआ है, वह सब जनभागीदारी, जनसहयोग, शासन, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग और इन सबसे बढ़कर जनता की इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाया है। इतिहास गवाह है कि इंदौर के विकास में जितने भी मील के पत्थर स्थापित हुए, चाहे वे वस्त्र व्यापार के क्षेत्र में हों या सामाजिक क्षेत्र में, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हो या चिकित्सालयों का विकास हो, जल-संसाधनों का प्रबंधन हो या नवीनतम स्वच्छता की व्यवस्था करना हो, इंदौर की जनता पूरी शिद्दत और संकल्पशक्ति से उस अभियान का हिस्सा बन जाती है।

समाचार पत्रों का भी योगदान - प्रो. राय ने कहा कि मैं विशेष तौर पर इंदौर के समाचार पत्रों की भूमिका को सराहना चाहता हूं। राष्ट्रीय और सामाजिक हित के मुद्दे को जन मिशन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब कान्ह नदी को स्वच्छ बनाना था तो पूरा इंदौर समाचार पत्रों के सहयोग से सड़कों पर उतर आया था। इंदौर में नर्मदा जल लाने के लिए भी सभी एक साथ थे और राजवाड़ा को इंदौर की शान बनाए रखने और निजी क्षेत्रों के अतिक्रमण से उसे बचाने के लिए भी हम सभी एकजुट रहे। इंदौर के सभी पारमार्थिक संगठनों ने शिक्षा के क्षेत्र को आगे बढ़ाया और देश का एकमात्र ऐसा शहर बना जहां अब आइआइएम व आइआइटी दोनों हैं। हम एजुकेशन हब बन चुके हैं। चिकित्सा, समाजसेवा, अक्षयदान की व्यवस्था, लगातार चलने वाले भोजन भंडारों की उपलब्धता, यह सब इंदौरवासियों की संकल्पशक्ति का ही परिणाम है।

Posted By: Hemraj Yadav

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