Swachh Survekshan 2022 : नवीन यादव, इंदौर (नईदुनिया)। स्वच्छता में लगातार छठी बार अव्वल आने वाले इंदौर के सामने अब हवा को स्वच्छ करना सबसे बड़ी चुनौती है। तमाम प्रयासों के बाद भी शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) कम नहीं हो रहा है। कई बार कार्ययोजना बनाई जा चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली है। शहर से डीजल चलित लोडिंग वाहनों में कमी, निर्माण कार्य की धूल रोकने जैसे निर्णय इसमें शामिल थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहर विस्तार को देखते हुए कम से कम नौ पाल्युशन मानिटरिंग स्टेशन स्थापित होने चाहिए। एक मशीन केवल कुछ किलोमीटर के दायरे में ही प्रदूषण का स्तर माप सकती है। फिलहाल रीगल तिराहे पर ही रियल टाइम मानिटरिंग मशीन लगी है। अभी मिल रहे आंकड़े भी आधे अधूरे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि शहर में पांच लाख वाहन 15 साल से ज्यादा पुराने हैं। इन पर कोई रोक नहीं है।

ये हैं प्रमुख चुनौतियां

प्लानिंग का अभाव - एक्यूआइ कम करने के लिए कोई विशेष प्लान नहीं है। वर्षाकाल में यह स्वत: कम हो जाता है और ठंड में बढ़ जाता है। गर्मी में एक्यूआइ बढ़ने का दोष पराली जलाने और हवा के कम या तेज गति से चलने को दे दिया जाता है।

डीजल वाहनों की संख्या - डीजल वाहनों पर रोक नहीं है। 15 साल पुराने वाहन भी आसानी से चल रहे हैं। वे काफी धुआं छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता है। वाहनों का फिटनेस भी मैन्युअल हो रहा है।

पीयूसी की सख्ती नहीं - वाहन चलाने के लिए पाल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाणपत्र कई राज्यों में अनिवार्य है, लेकिन इंदौर में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है। यहां तो एआइसीटीएसएल की बसें भी धुआं उड़ाती चल रही है।

उद्योगों पर नियत्रंण नहीं - शहर के उद्योगों की मनमानी जारी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी लापरवाही कर रहे हैं। सांवेर रोड, पालदा जैसे इलाकों में उद्योगों से वायु प्रदूषण हो रहा है, लेकिन बोर्ड कभी-कभार ही कार्रवाई करता है।

हरियाली बनाए रखना - शहर में सड़क निर्माण, मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ों की बली ली जा रही है। इसके बदले लगाए गए पौधों की संख्या काफी कम है। इनकी संख्या बढ़ना बड़ी चुनौती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार - प्रदूषण बोर्ड के मुख्य प्रयोगशाला अधिकारी एसएन पाटिल का कहना है कि शहर में एक्यूआइ कम करने के लिए हमें पेड़-पौधे लगाने होंगे। सिग्नलों पर वाहनों को बंद करना होगा। पेट्रोल-डीजल के स्थान पर सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करना होगा।

इतने डीजल वाहन आरटीओ में पंजीकृत

डंपर 6285, बस 4473, लोडर 2453, ट्रक 50370, ट्राली 4897, ट्रैक्टर 29611, टैंकर 2864

(डीजल कारें शामिल नहीं हैं)

इतने बैटरी वाले वाहन

ई रिक्शा 3659, कारें 229, बस 40, कुल 8013

(आंकड़े परिवहन विभाग के मुताबिक)

Posted By: Hemraj Yadav

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