Swachh Survekshan 2022 Results : (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वच्छता में सिरमौर इंदौर ने साल दर साल शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वेस्ट टू वेल्थ के अवधारणा को भी साकार किया है। इंदौर ने इस वर्ष छह तरह के कचरे के पृथक्कीकरण, थ्री आर के प्रयोग, पालीथिन पर रोक जैसे कठोर कदम उठाए। इसके कारण इंदौर को इस बार सात सितारों की रेटिंग मिल सकी।

कचरे से कमाई - नगर निगम को सूखे कचरे के पृथक्कीकरण प्लांट से प्रतिवर्ष 1.53 करोड़ रुपये, गीले कचरे से बायो सीएनजी प्लांट से प्रतिवर्ष 2.53 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है। इसके अलावा दो वर्षों में निगम ने कार्बन क्रेडिट बेचकर नौ करोड़ रुपये कमाए हैं। बायो सीएनजी प्लांट से बाजार मूल्य से पांच रुपये कम कीमत पर मिलने वाली गैस से सालभर में डेढ़ से दो करोड़ रुपये की बचत होगी। इस तरह इंदौर कचरे से प्रतिवर्ष 13 से 14 करोड़ रुपये कमा रहा है।

छह बिन पृथक्करण - इंदौर में घर-घर से कचरा एकत्र करने के साथ प्लांट पहुंचाकर उसका शत प्रतिशत निपटान किया जा रहा है। दूसरे शहर जहां गीले व सूखे कचरे को अलग करने की मशक्कत में जुटे हैं, वहीं इंदौर में गीले व सूखे कचरे के अलावा प्लास्टिक, घरेलू हानिकारक, इलेक्ट्रिक व सैनिटरी वेस्ट को अलग-अलग लिया जा रहा है।

थ्रीआर माडल - निगम ने रिसाइकिल, रियूज व रिड्यूज माडल पर गंभीरता से काम किया है। निगम ने शहर में एक हजार से ज्याद बैकलेन में सीमेंटीकरण, सफाई कर उनमें पेटिंग बनाई। वहां अनुपयोगी चीजों से कलाकृतियां सजाईं। एलआइजी सहित कुछ इलाकों में रहवासी बैकलेन में सब्जियां भी उगा रहे हंै। शहर में चार फोर आर गार्डन तैयार किए गए हैं।

शिकायतों का निराकरण - इंदौर 311 एप पर पिछले पांच वर्षों में 10.5 लाख शिकायतें पहुंचींं। इनका 24 घंटे में निराकरण किया गया। सफाई कार्य संबंधित शिकायतों को 99.8 फीसद तक निराकृत करने में सफलता मिली।

प्लास्टिक पर रोक - इंदौर के बाजारों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाई गई है। इसका असर यह हुआ कि सूखे में पहले जहां 800 किलो प्रतिदिन सिंगल यूज प्लास्टिक आता था, अब सिर्फ 200 से 300 किलो पहुंच रहा है। 120 माइक्रान से कम के पालीबैग को प्रतिबंधित किया गया है। पहले 400 किलो कैरीबैग की पालीथिन पहुंचती थी लेकिन अब इसमें 150 किलो की कमी आई। सीमेंट फैक्ट्रियों को अभी पुन: उपयोग में नहीं आने वाला 180 टन कचरा प्रतिदिन दिया जाता है।

सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट : इंदौर में प्रतिदिन में 60 टन भवन का मलबा एकत्र किया जाता है। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 100 टन क्षमता में सीएंडडी प्लांट संचालित हो रहा है। यहां पर मलबे से ईंट, पेवर ब्लाक व टाइल्स का निर्माण किया जा रहा है। इनका निगम के निर्माण कार्यों में भी इस्तेमाल हो रहा है। इस प्लांट के संचालन से भी निगम को कमाई हो रही है।

शहर सुंदरीकरण - एक दर्जन से ज्यादा चौराहों पर फाउंटेन लगवाए, जो हवा में उड़ने वाले धूल कण को सोखते हैं। चौराहों के लेफ्ट टर्न चौड़ीकरण, सेंट्रल डिवाइडर बनाए गए । इन पर पौधारोपण किया है। शहर में प्रमुख चौराहों, सड़कों व दीवारों पर पंेटिंग के लिए म्युरल व अनुपयोगी चीजों में म्युरल लगाए गए।

सातवीं बार जीत के लिए इन चुनौतियों को करना होगा पूरा

चुनौती 1 - इंदौर में 120 माइक्रान से कम के पालीबैग पर पूर्ण रूप से रोक व सिंगल यूज प्लास्टिक व डिस्पोजेबल पर लगाना होगा पूर्ण प्रतिबंध।

चुनौती 2 - अभी वायु गुणवत्ता का स्तर कम करने में इंदौर को पूरी तरह सफलता नहीं मिली है। अभी कुछ माह वायु प्रदूषण स्तर कम रहा है तो कुछ महीनों में बढ़ोतरी भी दिखाई दी है। ऐसे में अब यह प्रयास होगा कि वायु गुणवत्ता के लिए सालभर एक्यूआइ का स्तर 50 से कम हो।

चुनौती 3 - कचरे के उत्पादन में करनी होगी कमी। अभी 402 ग्राम प्रति व्यक्ति कचरा शहर में उत्पन्न हो रहा है। इसे 398 ग्राम प्रति व्यक्ति तक लाना होगा। इसके लिए होम कम्पोस्टिंग व जीरो वेस्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा। प्लास्टिक व डिस्पोजेबल में भी कमी लानी होगी।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close