swachh survekshan 2022 : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वच्छता प्रिय इंदौर शहर के बार-बार देश पर छा जाने की खूबी अब पर्यटन के क्षेत्र में भी नए आयाम खोल रही है। अभी तक जिन ऐतिहासिक इमारतों को ही देखने यदा-कदा पर्यटक शहर आते थे, वहीं अब यहां की स्वच्छता देखने, उसे कायम रखने की नीति को समझने और इसकी खूबसूरती को निहारने के लिए खासी संख्या में आ रहे हैं। यहां आने वालों में केवल आम लोग ही नहीं बल्कि देश-विदेश के प्रशासनिक अधिकारी, नेता, सामाजिक संगठन और एजेंसियों से जुड़े लोग भी हैं। यहां की स्वच्छता और पर्यटन विभाग की सहभागिता का ही परिणाम रहा कि हाल ही में नागरिक प्रबंधन वर्ग में इंदौर को राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार मिला। विश्व पर्यटन दिवस पर मिले इस पुरस्कार के बाद मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने शहर और आसपास के पर्यटन स्थलों की स्वच्छता को और भी बेहतर बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

इन कारणों से मिला पुरस्कार

बीते पांच माह में ही इंदौर आने वाले पर्यटकों की संख्या में 136 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2018-19 का राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जो शहर के हिस्से में आया उसकी बड़ी वजह पर्यटन स्थलों पर सुविधाघर का निर्माण और उसका रखरखाव, स्ट्रीट लाइट , पीने के पानी की व्यवस्था और संकेतक आदि सुविधा मुहैया कराना है।

वर्षभर में 60 से ज्यादा दलों ने देखा इंदौर

यहां के स्वच्छता का माडल देखने, उसे समझने के लिए वर्षभर में अलग-अलग राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों के 60 से ज्यादा दल शहर आए। यही नहीं विदेशी भी यहां की स्वच्छता का माडल देखने आए। पिछले माह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का दल जिसमें 15 देशों के 23 लोग शामिल थे, सफाई व्यवस्था देखने आए थे। इसके अलावा विदेश से आए 30 देशों के 35 छात्रों के दल ने भी शहर में स्वच्छता से जुड़े नवाचारों का अध्ययन किया था। इसके अलावा विश्व बैंक का दल भी इंदौर आ चुका है। इतना ही नहीं शहर में होने वाली मैनेजमेंट, मेडिकल व औद्योगिक कांफ्रेस व सेमिनारों में आने वाले मेहमान भी शहर की सफाई को देख प्रभावित हुए। अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों के आने से भी यहां का पर्यटन बढ़ा। ये अतिथि ऐतिहासिक धरोहर भी देखने गए। होटल इंडस्ट्री, फूड इंडस्ट्री, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पाद को भी बढ़ावा मिला। धार्मिक पर्यटन की दिशा में भी इजाफा हुआ।

अब इस दिशा में है ध्यान

मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक एके स्वर्णकार के अनुसार स्वच्छता के मापदंड पर बार-बार खरे उतरने के बाद जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इस बार भी शहर के सिरमौर बनने पर पर्यटन बढ़ने की और भी उम्मीद है। ओंकारेश्वर में सुविधाघर बनाकर वहां की स्वच्छता की जिम्मेदारी एजेंसी को दी गई है और अब शहर के समीप लोटस वैली में भी इसी तरह कार्य किया जाना है। प्रयास किया जा रहा है कि शहर में पर्यटन विभाग का होटल बन जाए ताकि यहां पर्यटकों को ठहरने की और भी बेहतर सुविधा मिल सके। इसके बाद क्षेत्र के अन्य पर्यटन स्थलों पर भी स्वच्छता के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।

यहां भी मिला बढ़ावा

इंदौर में स्वच्छता के माडल को समझने के लिए जो समूह यहां आए उससे यहां के पर्यटन स्थलों को बहुत बढ़ावा मिला। शहर के 56 दुकान को भी स्वच्छता के लिए क्लीन स्ट्रीट फूड हब का पुरस्कार मिल चुका है। इस पुरस्कार के बाद यहां एक और प्रयोग हुआ जिसमें व्यंजन कागज की प्लेट, दोने में देना बंद कर दिया गया। इससे यहां से निकलने वाले अपशिष्ट में बहुत कमी आई। यही नहीं इस प्रयोग से यहां फैलने वाला कचरा भी समाप्त हो गया। इसके बाद सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने से लोग स्टील, एक्रेलिक के बर्तन उपयोग में लाने लगे और चाय-दूध कुल्हड़ में मिलने लगे।

रातभर खुली रहने लगी दुकानें

यहां आने वाले पर्यटक दिन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू घूम लेते हैं और रात इंदौर में ठहरते हैं। ऐसे में यहां जब रात को भी बाजार खुलने की सुविधा शुरू हुई तो शहर में पर्यटकों की संख्या और भी बढ़ने लगी। अब शहर का एक हिस्सा 24 घंटे खुला रहता है जहां पर्यटक अपनी सुविधा से उसका आनंद ले सकता है।

मंदिरों ने भी अपनाया स्वच्छता का माडल

इंदौर के मंदिरों ने भी स्वच्छता के लिए पहल की तो वहां का आकर्षण और भी बढ़ गया। खजराना गणेश मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर सहित कई ऐसे मंदिर हैं जहां निर्माल्य से खाद बनाई जाती है। इसका लाभ यह हुआ कि मंदिर परिसर स्वच्छ नजर आने लगे। इसके अलावा मंदिरों के बाहर सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित होने से उसकी वजह से होने वाला कचरा भी अब नहीं होता। बिजासन मंदिर में बने तालाब को न केवल स्वच्छ किया गया बल्कि उसे सुव्यवस्थित बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close