Swachh Survekshan 2022 : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर ने सफाई के मामले में लगातार देश में छठी बार नंबर वन का खिताब जीता है। दिल्ली में शनिवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के हाथों इंदौर नगर निगम की आयुक्त प्रतिभा पाल को यह सम्मान मिला। इंदौर को साफ शहर बनाने में शहरवासियों के साथ ही नगर निगम के कई अधिकारियों की मेहनत भी है।

प्रतिभा पाल, निगमायुक्त : इंदौर के सफाई कार्य की निगरानी के साथ तय मापदंडों को पूरा करने में आयुक्त की अहम भूमिका रही। ये सुबह से निरीक्षण के लिए पहुंचती थीं। जोनल अधिकारियों व कर्मचारियों की सतत मीटिंग लेकर उनका मार्गदर्शन किया। सर्वेक्षण के दस्तावेजीकरण में एक-एक दस्तावेज की स्वयं जांच कर पोर्टल पर अपलोड करवाया। जहां जरूरत रही, वहां कर्मचारियों पर प्रशासनिक सख्ती कर दंडित किया और जहां अच्छा काम दिखा वहां प्रशंसा भी की।

संदीप सोनी, पूर्व अपर आयुक्त : मैदानी स्तर पर निगम के स्वच्छता संबंधित जागरूकता अभियान में इनकी अहम भूमिका रही। सफाई कार्य की निगरानी के लिए ये सुबह से निकल जाते थे। दस्तावेजीकरण में भी विशेष योगदान रहा। ड्रेनेज विभाग के प्रभारी होने के दौरान सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने व नाला टेपिंग कार्य में अहम भूमिका रही।

महेश शर्मा, अधीक्षण यंत्री : शहर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए किए गए कार्यों में योगदान दिया। रेड लाइट पर इंजन बंद करने की मुहिम हो या उद्योगों व रेस्त्रां संचालकों को कोयले के स्थान पर सीएनजी के उपयोग के लिए तैयार करने के लिए बैठकों में अहम रोल रहा। देश के अन्य शहरों से आने वाले दलों को सफाई के लिए किए गए कार्यों का अवलोकन करवाने का दायित्व निभाया। शहर में थ्री आर के तहत हुई गतिविधियों में रियूज मेला, फोर आर गार्डन तैयार करवाया। सिंगल यूज प्लास्टिक की मुहिम में भी निगम की टीम के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाई।

सुनील गुप्ता, कार्यपालन यंत्री : नदी-नालों की सफाई और आउटफाल बंद करने में अहम भूमिका रही। नदी व नालों के किनारे तीन साल में सात सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट इनकी निगरानी में बने। सीवरेज के उपचारित पानी के उपयोग के लिए ओवरहेड टंकी का निर्माण करवाया। 120 उद्यानों में उपचारित पानी पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया। शहर में भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत घरों व प्रतिष्ठानों के बोरिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने, जियो टैगिंग करवाई।

अनूप गोयल, कार्यपालन यंत्री : इनके पास कम्युनिटी टायलेट की सुविधाओं को बेहतर बनाने का जिम्मा था। सर्वे के दस्तावेज तैयार करने वाली टीम में इनकी अहम भूमिका रही। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर सीएनजी प्लांट को तैयार करवाया। बिल्डिंग परमिशन विभाग के अंतर्गत वायु गुणवता सुधार के लिए निर्माणाधीन भवनों पर ग्रीन नेट व शेड की अनिवार्यता की।

डा. अखिलेश उपाध्याय, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी : शहर के 12 हजार सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी इनके पास है। सीएसआइ, दारोगा व सफाईकर्मियों के बीट मैनेजमेंट की व्यवस्था को देखते हैं। दीपावली, रंगपंचमी व अन्य त्योहारों के मौकों पर शहर में विशेष अभियान चलवाते हैं। सफाई मित्रों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर व उन्हें कार्य प्रशिक्षण दिलवाने का काम किया। रोड स्वीपिंग मशीन का मैनेजमेंट भी यह देख रहे हैं।

मनीष पांडे, प्रभारी वर्कशाप : शहर में सफाई में उपयोग आने वाले 1500 वाहनों के मेंटेनेंस के साथ उनके चालक व हेल्पर का मैनेजमेंट देखते हैं। तीन साल में कई इनोवेशन निगम की वर्कशाप विभाग में किए। कोविड के दौर में इन्होंने प्रेशर गाड़ी को सैनिटाइजेशन मशीन के रूप में तैयार किया। जलकुंभी निकालने के लिए वीट हार्वेस्टर मशीन तैयार की। ड्रेनेज चैंबर की सफाई के लिए साइकिल डिसेल्टिंग रिक्शा तैयार किया। पौधों की कंटाई छंटाई व उपचार के लिए ट्री एंबुलेंस तैयार की। गणेश विसर्जन के दौरान पोकलेन में हाइड्रोलिक प्लेटफार्म तैयार किया। इसके अलावा एमवाय चौराहे वायु प्रदूषण कम करने के लिए अनुपयोगी चीजों का इस्तेमाल कर पंखे व धूल सोखने वाले कूलर तैयार किए।

Posted By: Hemraj Yadav

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