Swachh Survekshan 2022 Results: उदय प्रताप सिंह, इंदौर। स्वच्छता में इंदौर ने जो मुकाम आज हासिल किया है, उसकी राह इतनी आसान नहीं थी। वर्ष 2015 से अब तक इंदौर ने एक-एक करके सफाई से जुड़ी हर छोटी से बड़ी समस्या पर काम किया। पहले इंदौर में भी देश के अन्य शहरों की तर्ज पर खुले में कचरा पेटियां, उसके पास गंदगी व बदबू, पशु घूमते नजर आते थे। शहरवासियों ने स्वच्छता को न सिर्फ आदत बनाया, बल्कि इसे अपने जीवन में उतारने के साथ संस्कार बना लिया। यही वजह है कि आज इंदौर देश ही नहीं विश्व के सबसे साफ शहरों में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

एटूजेड कंपनी को हटा निगम ने थामी स्वच्छता की डोर

2015 में शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर हुआ करते थे। कचरा पेटियों की स्थिति खराब थी। कचरा पेटियां नियमित खाली भी नहीं होती थीं। निगम ने शहर की कचरा व्यवस्था को संभालने वाली एटूजेड कंपनी को हटाकर सारी व्यवस्थाएं अपने हाथ में लीं।

कचरा पेटियां हटाईं, 350 डोर टू डोर वाहन उतारे मैदान में

2016 : पहला स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 25

निगम ने सभी 85 वार्डों में घर-घर से कचरा एकत्र करने की व्यवस्था की। इंदौर शहर में घर-घर से कचरा संग्रहण के लिए 350 वाहन में मैदान में उतारे। इसी वर्ष शहर से 2200 कचरा पेटियां हटाई गईं और खुले में कचरा फेंकने पर रोक लगाई गई। सूखे कचरे की छंटाई के लिए 500 टन प्रतिवर्ष की क्षमता वाली मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी स्थापित की गई। कचरा बीनने वाले 700 रैगपिकर्स को इससे जोड़कर उन्हें रोजगार दिया गया। इस वर्ष शहर में करीब पांच हजार शौचालय व 400 यूरिनल बनाए गए।

गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेना शुरू, सफाई मित्रों की नियुक्ति

2017 : दूसरा स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 1

डोर टू डोर कचरा संग्रहण व बिन फ्री शहर बनाने पर इस वर्ष पहली बार नंबर 1 का खिताब मिला। इसके साथ ही इंदौर शहर खुले में शौच मुक्त हुआ और उसे ओडीएफ प्लस का खिताब मिला। इस दौरान सामुदायिक शौचालयों के निर्माण जोर दिया गया। इस दौरान निगम ने शहर में आवारा पशुओं को हटाने की मुहिम चलाई। इस वर्ष डोर टू डोर कचरा संग्रहण वाहनों की संख्या 500 की गई। इसके बाद गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग लेना शुरू किया और वाहन में दो कम्पार्टमेंट बनाए गए। 1200 नए सफाईमित्रों की नियुक्ति और प्रमुख सड़कों पर 50 और 100 मीटर की दूरी पर 4500 लिटरबिन लगाए।

गीले कचरे से बायो सीएनजी तैयार कर बसें चलाईं

2018 : तीसरा स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 1

इस वर्ष चोइथराम मंडी में 20 टन क्षमता का बायो सीएनजी प्लांट लगाया। इसमें तैयार सीएनजी से बसें चलाईं। इसके अलावा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 50 हजार टन जमा कचरे की छंटाई कर उसे खत्म करने का काम शुरू किया। यहां पर कचरे के पृथक्करण का काम देख रही एटूजेड कंपनी को हटाकर निगम ने सारी जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। खजराना मंदिर व रणजीत हनुमान मंदिर में रोज 500 किलो फूल व पत्तियों से खाद बनने लगी। शहर में 10 स्थानों पर गारबेज ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए।

15 लाख टन कचरे के पहाड़ को किया खत्म

2019 : चौथा स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 1, फाइव स्टार रेटिंग

इस वर्ष ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 15 लाख टन कचरे के पहाड़ को खत्म किया गया और करीब 100 एकड़ जमीन खाली हुई। इस पर निगम ने वृहद पौधारोपण किया। इस समय प्रतिदिन का गीला व सूखा कचरा का निपटान उसी दिन किए जाने व्यवस्था शुरू की। गीले कचरे से ट्रेंचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन 60 टन खाद बनना शुरू हुई। इसी वर्ष निगम ने होम कम्पोस्टिंग व गार्डन में हरे कचरे से खाद बनाने की यूनिट की शुरुआत की। ट्रंेचिंग गाउंड पर सूखे कचरे के पृथक्करण का नया प्लांट शुरू हुआ। कबीटखेड़ी में बायो सीएनजी प्लांट शुरू हुआ। ओडीएफ डबल प्लस का प्रमाणपत्र और फाइव स्टार रेटिंग का देश का पहला शहर इंदौर बना।

थ्री आर माडल को अपनाया

2020 : पांचवां स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 1, फाइव स्टार रेटिंग, ओडीएफ डबल प्लस

थ्री आर के माडल को अपनाकर हमने बैकलेन की सफाई की। वेस्ट टू आर्ट तक चौराहों व उद्यानों में कलाकृतियां बनाईं। अमानक पालीथिन पर रोक की मुहिम शुरू हुई। शहर में भवन निर्माण व तोड़े गए मलबे को एकत्र करने लिए चार स्थानों पर सीएंडडी कलेक्शन सेंटर बनाए और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 100 टन क्षमता का सीएंडडी प्लांट लगाया। यहां पेवर ब्लाक व ईंट बनाना शुरू हुई। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 50 हजार पौधे लगाए।

नदी नालों की सफाई, कार्बन क्रेडिट से हुई कमाई

2021 : छठा स्वच्छ सर्वेक्षण : रैंक 1, फाइव स्टार रेटिंग, वाटर प्लस

शहर में ग्रीन स्लम बस्तियां विकसित की गईं। 100 बैकलेन की सफाई के साथ वहां पेंटिंग कर उनका स्वरूप बदला। 550 टन गीले कचरे से खाद बनाने वाले प्लांट की आधारशिला रखी गई। पांच जीरो वेस्ट वार्ड बनाए। नदी नालों की सफाई हुई। नालों के किनारे छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए। नाला टेपिंग कर 4200 बड़े आउटफाल बंद किए। स्लज हाइजीनेशन प्लांट का निर्माण शुरू हुआ। इस वर्ष निगम को कार्बन क्रेडिट से करीब नौ करोड़ रुपये की कमाई हुई। इंदौर देश का पहला वाटर प्लस शहर बना। तीसरी बार फाइव स्टार रेटिंग मिली। चौथी बार स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर 1 का खिताब मिला।

सिक्स बिन का फार्मूला और बायो सीएनजी से कमाई

2022 : 7वां स्वच्छ सर्वेक्षण : नंबर एक व सेवन स्टार

ट्रेंचिंग ग्राउंड में 500 टन क्षमता का बायो सीएनजी प्लांट का शुभारंभ हुआ। शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए मुहिम चलाई। डीजल के वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दिया। शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक की मुहिम चलाई गई और बाजारों में इस पर प्रतिबंध लगाया गया। शहर में छह तरह का कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था शुरू हुई। स्लज हाइजीनेशन प्लांट चालू हुआ। इसके अलावा 10 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हुए।

Posted By: Prashant Pandey

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