Health Tips: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इन दिनों मौसम बार-बार बदल रहा है। कभी तेज धूप रहती है तो कभी वर्षा होती है। दिन में गर्मी और रात को मौसम में ठंडक घुल जाती है। बदलते मौसम में सेहत का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है।

आयुर्वेद विशेषज्ञ डा. सतीशचंद्र शर्मा के अनुसार ऋतु परिवर्तन के वक्त खान-पान और आहर-विहार का ध्यान रखना आवश्यक है। इस समय लापरवाही बरतने से कई रोग हो सकते हैं और हो सकता है कि वह रोग लंबे वक्त तक अपना नकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर पर छोड़ जाएं। इस दौरान गला खराब होना, सर्दी-जुकाम होना बहुताय से होता है और इस समस्या से बचने के लिए आवश्यक है कि तले-गले पदार्थ और मिठाइयों का सेवन कम से कम करें। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि गुनगुना पानी पिएं।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन आंवले का सेवन किसी न किसी रूप में करें। आंवले में विटामिन सी होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और इसमें कई अन्य औषधीय गुण भी होते हैं। इसके अलावा मुलेठी, हल्दी, दालचिनी, अश्वगंधा, तुलसी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रोगों का नाश करने में सहायक सिद्ध होते हैं। बदलते मौसम में सर्दी होने पर गुनगुना पानी पिएं और गुनगुने पानी से ही स्नान करें। हल्दी की गठान को घी में सेकें और जब वह हल्की भूरे रंग की हो जाए तो उसे ठंडा कर पीस लें। इस हल्दी चूर्ण को आधा-आधा चम्मच सुबह-रात में दूध के साथ खाएं। हल्दी से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है इसलिए सुबह-शाम दूध के साथ आधा-आधा चम्मच हल्दी चूर्ण का सेवन करें।

घृत भ्रष्ट हरिद्रा का सेवन भी सुबह-शाम दूध के साथ करना बेहतर होगा। नाक में एक-एक बूंद अणु तेल नियमित डालें। अणु तेल नहीं होने पर तिल या सरसों का तेल भी उपयोग में ला सकते हैं। जुकाम अक्सर हो जाता हो तो नाक और नाभी में तिल या सरसों का तेल लगाए। कोरोना काल में लिया गया काढ़ा सामान्य बुखार में लिया जा सकता है।

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