इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर जिले के सरकारी, प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले एक लाख छात्रों में से 60 हजार के पास मोबाइल नहीं होने से ये बच्चे विभाग की ऑनलाइन क्लास व ई कंटेट के माध्यम से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण छात्र अभी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे छात्रों के मार्गदर्शन के लिए 'हमारा घर हमारा विद्यालय कार्यक्रम' के तहत शिक्षकों को बच्चों के मोहल्ले तक भेजने की व्यवस्था की है।

कई शिक्षक बच्चों के पास नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण विभाग ने शिक्षकों की मॉनिटरिंग के लिए शुक्रवार से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सहायक संचालक, डीपीसी, जनशिक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी, बीआरसी व संकुल प्राचार्यों को स्कूलों की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि वे वहां के शिक्षकों की मॉनिटरिंग कर सुनिश्चित कर सकें कि शिक्षक छात्रों के पास पहुंचे।

विभाग के हर अधिकारी को प्रतिमाह निर्धारित स्कूलों में मॉनिटरिंग का लक्ष्य दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी 'शाला दर्पण' एप के माध्यम से संबंधित स्कूलों की मॉनिटरिंग कर सकेंगे। निरीक्षक को एक दिन में दो स्कूलों से संपर्क करना होगा।

मोहल्ला क्लास के तहत इंदौर जिला प्रदेश में आठवें नंबर पर रहा था। इंदौर के 88 फीसद स्कूलों के छात्रों के पास शिक्षक पहुंचे हैं। जिला परियोजना समन्वयक अक्षयसिंह राठौर के मुताबिक इंदौर जिले में मोहल्ला क्लास की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जब तक प्राइमरी व मिडिल स्कूल नहीं खुलते हैं, तब तक बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक उनके मोहल्ले तक जाएंगे। वे बच्चों की कॉपी चेक करेंगे। बच्चों की पढ़ाई संबंधी समस्या भी ऑनलाइन हल की जा रही है।

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