इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि DAVV News Indore। बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) के निर्देश पर लॉ कोर्स की आनलाइन परीक्षा करवाना देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के लिए सिरदर्द बनी है। सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी आने से सैकड़ों विद्यार्थियों की कापियां विश्वविद्यालय को नहीं मिल पाई है। इसके चलते छात्र-छात्राओं का रिजल्ट रुका हुआ है। अब इनकी कापियां ढूंढने के लिए चार आइटी विशेषज्ञों की टीम काम में जुटी है। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा देने के बाद कॉपियां स्कैन कर विश्वविद्यालय द्वारा दी गई लिंक पर आनलाइन भेजी थी। बाकायदा इसका कंफर्मेशन भी मिला, लेकिन मूल्यांकन केंद्र के पास डाटा उपलब्ध नहीं है।

फरवरी-मार्च 2021 के बीच बीएएलएलबी, एलएलबी, बीकामएलएलबी, एलएलएम सहित अन्य ला कोर्स के विभिन्न सेमेस्टर की आनलाइन परीक्षा हुई। कापी जमा करने के लिए विद्यार्थियों के सामने दो विकल्प रखे थे, जिसमें स्कैन कर विद्यार्थियों को आनलाइन उत्तर पुस्तिका देना था। साथ ही संग्रहण केंद्र में जाकर भी जमा कर सकते थे। जून-जुलाई के बीच विश्वविद्यालय ने इन कोर्स के रिजल्ट जारी करना शुरू कर दिए। सूत्रों मुताबिक दो इंदौर, एक धार और खरगोन ला कालेज की मान्यता-संबद्धता नहीं है।

इसके चलते उनके रिजल्ट रोके जाएंगे। इसके बारे में कालेज प्रबंधन को पहले ही अवगत करा दिया था। मगर कई एेसे छात्र-छात्राएं भी सामने आए, जो परीक्षा में शामिल हुए और उन्होंने पेपर के घंटेभर बाद कापियां भी जमा कर दी। ई-मेल पर प्राप्ती का मेल भी आया। बावजूद इसके इन छात्र-छात्राओं के रिजल्ट रुके हुए है। परीक्षा नियंत्रक डा. अशेष तिवारी का कहना है कि साफ्टवेयर में तकनीकी खराबी के चलते कापियों का डाटा नहीं मिल रहा है। इसके लिए आइटी विशेषज्ञों की मदद ले रहे है।

वैसे विद्यार्थियों से दोबारा कापियां बुलवाने पर विचार किया जा रहा है। वे बताते है कि चार विशेषज्ञों की टीम विद्यार्थियों की कापियां ढूंढने में लगी है। 700 में से 500 विद्यार्थियों के कॉपियां मिल चुकी है। इन दिनों विद्यार्थियों की कापी का डाटा रिकवर किया जा रहा है। वे बताते है कि विवि द्वारा दी गूगल फॉर्म की लिंक पर खाली ई-मेल भेजने पर भी कंफर्मेशन विद्यार्थियों को मिला है, जो अॉटोमेटेड जनरेट ईमेल होता है।

ये है मुख्य वजह

- कापियां स्कैन कर गलत फॉर्मेट में फाइल बनाकर भेजना।

- बगैर रोलनंबर बदले विद्यार्थियों की कापी स्कैन कर भेजना।

- विवि की बजाए कालेज द्वारा जारी लिंक पर कापी देना।

- स्कैन कॉपी में वायरस होने से फाइल करप्ट होना।

Posted By: Sameer Deshpande

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