आपरेशन मिडनाइट

सक्रिय सदस्य-85

अनाधिकृत सदस्य-800

जब्त सामग्री-नामांकन फार्म, बैनर, पर्चे, बैंक डिटेल्स, लैपटाप, मोबाइल, सीपीयू और कंप्यूटर

-छापे-जवाहर मार्ग स्थित कार्यालय पर

-छापे में टीमें-एनआइ और एटीएस के कमांडो व अधिकारी

प्रमुख गतिविधियां

-कोतवाली थाने का घेराव करने में प्रमुख भूमिका

-नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन में भीड़ एकत्र की।

-खरगोन सांप्रदायिक दंगों के बाद गोपनीय रूप से सक्रियता बढ़ाई।

- मुखौटा- समाज सेवा और समुदाय की सहायता।

Terror Funding Case: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार पीएफआइ नेता अब्दुल करीम,अब्दुल खालिद और मोहम्मद जावेद दिखावे के लिए चूड़ी, मोबाइल और बेकरी का धंधा कर रहे थे। स्थानीय इंटेलिजेंस विंग पांच माह से इनका पीछा कर रही थी। शहर में यूं तो करीब 800 पीएफआइ कार्यकर्ता मौजूद हैं, लेकिन इंटेलिजेंस के पास 85 अधिकृत पदाधिकारियों का डाटा है।

पापुलर फ्रंट आफ इंडिया पिछले साल अगस्त में तस्लीम (चूड़ीवाला) की पिटाई के बाद खुलकर मैदान में आया और कोतवाली थाने का घेराव किया था। इंटेलिजेंस एवं सुरक्षा डीसीपी रजत सकलेचा की रिपोर्ट पर पीएफआइ की सहयोगी पार्टी एसडीपीआइ के पदाधिकारी मुमताज कुरैशी, जैद पठान और अब्दुल रऊफ बेलिम के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर जिलाबदर की कार्रवाई की गई।

इसी दौरान पता चला कि अब्दुल करीम बेकरीवाला दिखावे के लिए बेकरी का धंधा करता है, लेकिन उसका प्रमुख काम पीएफआइ को बढ़ावा देना है। मोहम्मद जावेद भी भंवरकुआं क्षेत्र में मोबाइल दुकान की आड़ में संगठन की गतिविधियां संचालित करता है। इसी तरह अब्दुल खालिद चूड़ी व्यवसाय के बहाने पीएफआइ की बैठकों में भाग लेने जाता है।

बुधवार रात एजेंसी ने आरोपितों के घर छापा मारा तो स्वजन भी यह सुनकर चौंक गए कि आरोपितों को बाहर से आर्थिक मदद मिल रही थी। जांच में शामिल एक अफसर के मुताबिक हमने करीब 40 फोन और बैंक खातों को ट्रैप किया लेकिन आरोपित चकमा दे देते थे। नकद लेनदेन के कारण एजेंसी फंडिंग की पुख्ता सूचना होने पर भी आरोपितों को पकड़ नहीं पा रही थी।

ताले तोड़कर छतों के रास्ते घुसे कमांडो

एनआइए को सबसे ज्यादा मशक्कत मोहम्मद जावेद के घर छापे में हुई। जावेद ने घर में जाते ही चैनल गेट पर ताला लगा दिया था। दबिश के पूर्व एक टीम ने ताला तोड़ा तो दूसरा दस्ता छत पर चढ़ गया। टीम को देखते ही जावेद सकते में आ गया। उसकी मां खेरून बी, पत्नी फिरदौस और भाई यासीन ने विरोध किया लेकिन सभी के फोन छीन लिए गए।

करीब एक घंटे सर्चिंग के बाद टीम ने लेनदेन के दस्तावेज, रजिस्टर, बैंक संबंधी जानकारी, नामांकन फार्म जब्त किए। सुबह तक गिरफ्तारी की अधिकृत सूचना न मिलने पर फिरदौस मल्हारगंज थाने पहुंची और जावेद के अपहरण का आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इन्कार किया और बताया उसे टेरर फंडिंग के मामले में पकड़ा गया है। फिरदौस के मुताबिक वह रेडिमेड कपड़ों का व्यवसाय करती है। अफसर उसके रजिस्टर और कपड़ों के बिल भी ले गए। घर वालों के सात मोबाइल भी जब्त किए।

गुप्त कार्रवाई कर रही थी पुलिस और प्रशासन की टीम

इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस व प्रशासन की टीम ने गुप्त कार्रवाई शुरू कर दी थी। पीएफआइ से संबंध रखने वाले जैद पठान को कलेक्टर मनीषसिंह ने रासुका में जेल भिजवा दिया था। जबकि अब्दुल करीम पर गोपनीय रूप से शिकंजा कसा जा रहा था। उसकी भंवरकुआं स्थित बेकरी शाप पर एक बार छापेमार कार्रवाई हो चुकी थी। एरोड्रम की दुकान पर कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। इसी तरह मो.जावेद और अब्दुल खालिद की घेराबंदी की रूपरेखा बनाई जा रही थी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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