इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिसकी गवाही से आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी की सजा मिली उसी साहसी लड़की और उसके पिता को मुंबई में आज तक एक अदद घर नहीं मिल पाया है। जिस भी जगह किराए के मकान में रहते हैं कुछ समय बाद उन्हें खाली करना पड़ता है। रिश्तेदार और सोसायटी के लोग उनसे इसलिए दूरी बना लेते हैं कि कहीं आतंकवादियों के गुस्से का शिकार वो भी न बन जाएं?

देश के लिए आतंक के खिलाफ साहस की कीमत ऐसे चुकाना पड़ेगी उस समय न तो देविका रोटावन ने ऐसा सोचा था न उनके पिता नटवरलाल रोटावन ने। पर मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले के 9 साल 2 महीने बाद भी देविका और उनके पिता इस गवाही की कीमत चुका रहे हैं। देविका व उनके पिता एक कार्यक्रम में शामिल होने गुरुवार को इंदौर आए।

गौरतलब है कि 26/11 के आतंकी हमले में मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) रेलवे स्टेशन पर जब कसाब और उसका साथी अबु इस्माइल एके-47 से गोलियां बरसा रहे थे तब अपने पिता और भाई जयेश के साथ वहां मौजूद देविका के दाहिने पैर में भी कसाब की गोली लगी थी। बाद में देविका व उनके पिता इस मामले में स्पेशल कोर्ट में सरकारी गवाह बने थे। इसके बाद ही कसाब को फांसी हुई थी।

आतंकियों के डर से परिवार ने भी बनाई दूरी

देविका व नटवरलाल बताते हैं कि इतने सालों बाद भी राजस्थान में उनके पुश्तैनी गांव में परिवार केवल उनसे इसलिए दूरी बनाकर रहता है कि कहीं आतंकियों के निशाने पर वो भी न आ जाएं। इसी का नतीजा है कि हाल ही में जब परिवार में शादी हुई तो निमंत्रण-पत्र में नटवरलाल और देविका का नाम नहीं दिया गया। नटवरलाल अपनी बेटी देविका और बेटे जयेश के साथ मुंबई के बांद्रा में किराए के मकान में रह रहे हैं। जहां भी रहने जाते हैं आसपास की सोसायटी के लोग इसलिए उनसे दूरी बना लेते हैं कि वे 26/11 के आतंकी हमले में कोर्ट में गवाह बने थे। यहां तक कि पूना में रह रहे देविका के बड़े भाई ने भी उनसे दूरी बना ली है। उसने अपनी शादी में भी इनको नहीं बुलाया।

मोदी को भी लिखा पत्र, नहीं मिला जवाब

नटवरलाल को मुंबई में बार-बार घर बदलना पड़ता है, इसलिए उनकी इच्छा है कि अब मुंबई में उनको सरकार एक स्थायी घर मुहैया करा दे। आवास समस्या के लिए देविका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। पिता-पुत्री बताते हैं, हम एक बार प्रधानमंत्रीजी से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। उनसे मिलने के कई प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। इस समय देविका 19 साल की हैं लेकिन हमले के बाद उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई और लगातार ऐसे हालात बने कि वे हाईस्कूल भी पास नहीं कर पाई। इस बार वे फिर हाईस्कूल की परीक्षा में बैठी है।

बिजनेस खत्म, अब करते हैं नौकरी

नटवरलाल कहते हैं, सरकार ने हमें आर्थिक मदद की, लेकिन हमले और गवाही के बाद मुंबई में मेरा ड्राय फ्रूट का बिजनेस भी खत्म हो गया। अब एक दोस्त की दुकान पर काम करता हूं, लेकिन अपना कारोबार शुरू करने की स्थिति में नहीं हूं। व्यापारी मुझसे व्यवहार करने से भी कतराते हैं।

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