इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दिसंबर में रेलवे पार्सल आफिस से पकड़ी गई सिगरेट की खेप लावारिस घोषित कर दी गई। रेलवे माल गोदाम से पकड़े गए सिगरेट के 96000 पैकेट को अब राज्य जीएसटी विभाग नीलाम करेगा। तमाम कोशिशों के बावजूद सिगरेट पर दावा करने कोई सामने नहीं आया। जीएसटी विभाग की जांच में पता चला कि तस्करों ने बड़े शातिर ढंग से सिगरेट की खेप को भोपाल से इंदौर के लिए भेजा था। भेजने वाले के नाम से लेकर जिस बिल का सहारा माल भेजने में किया गया वह पता और दुकान भी फर्जी पाई गई।

जीएसटी विभाग ने सिगरेट को लावारिस और तस्करी का मान कर नीलामी कर कर वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए सिगरेट का मूल्यांकन करवाया जा रहा है। शासकीय रेलवे पुलिस ने 13 दिसंबर को रेलवे पार्सल से 20 बोरियों में भरी सिगरेट बरामद की थी। बाद में जीएसटी विभाग को केस सौंप कर माल सुपुर्द कर दिया गया था। जीएसटी विभाग की एंटी इवेजन विंग-बी के संयुक्त आयुक्त आरके सलूजा और उपायुक्त रूबी रघुवंशी ने मामले में जांच को आगे बढ़ाया। माल भेजने और पाने वाले के तौर अब्दुल्ला का नाम लिखा था। असल में उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। विभाग के अधिकारियों ने सिगरेट भेजने के लिए उपयोग की गई बिल्टी के आधार पर भोपाल के राज एक्सप्रेस नामक ट्रांसपोर्ट के संचालक राहुल राय को भी हाजिर होने के लिए समन भेजा। हालांकि ट्रांसपोर्टर से भी माल भेजने वाले के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी। माल भेजने के लिए भोपाल के एके ट्रेडर्स का बिल दिया गया था। विभाग ने अपनी ओर से पते पर मौका मुआयना किया तो वहां भी ऐसी कोई दुकान या व्यापारिक संस्था नहीं मिल सकी। साफ हो गया कि तस्करों ने शातिर ढंग से खुद को छुपाते हुए सिगरेट की खेप इंदौर के बाजार में खपाने के लिए भेजी थी।

10 लाख रुपये कीमत - सिगरेट की खेप का जीएसटी विभाग ने अपने स्तर पर मूल्यांकन शुरू कर दिया है। दरअसल जीआरपी ने सिगरेट की कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा आंकी थी। हालांकि जीआरपी ने एमआरपी के आधार पर सिगरेट का मूल्यांकन किया था। जीएसटी अब शासन द्वारा अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से सिगरेट का फिर से मूल्यांकन करवा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक रूप से सिगरेट की थोक बाजार में कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है। कीमत के आधार पर अब विभाग सिगरेट की नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगा। इस बारे में सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी

भोपाल में बनी, बुकिंग एजेंट बने चैनल - पहले लाकडाउन के बाद डीआरआइ और डीजीजीआइ ने अवैध रूप से सिगरेट बनाने के मामले में इंदौर के कई लोगों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद से इंदौर के सिगरेट कारोबारियों ने भोपाल को अपने कारोबार का केंद्र बना लिया है। कई बड़ी कंपनियों के लिए जाब वर्क कर रहे सिगरेट निर्माता गड़बड़ी कर भोपाल में ही नकली सिगरेट बनवा रहे हैं। दूसरी ओर विदेशी सिगरेट भी भोपाल से इंदौर भेजी जा रही है। माल मंगवाने और भेजने में पार्सल बुकिंग एजेंट अहम भूमिका निभा रहे हैं। फर्जी नामों और दस्तावेजों से सिगरेट भेजी जाती है ताकि माल पकड़े जाने पर तस्करों पर कार्रवाई न हो सके।

Posted By: Hemraj Yadav

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