Indore Kapeesh Dubey Column, कपीश दुबे, इंदौर, नईदुनिया। नगरीय निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के फीके प्रदर्शन से शहर और जिला अध्यक्ष की कुर्सी बदलने की जो चर्चा चली थी, वह श्राद्धपक्ष में ठंडी पड़ गई। शहर में कमल नाथ के भरोसेमंद चेहरे विनय बाकलीवाल ने भी इस बीच राजनीतिक जमावट करने में कसर नहीं रखी। नए प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल की शहर आमद पर बाकलीवाल के घर हुई दावत ने विरोधियों को अलग संदेश दे दिया। हालांकि शहर के अग्रवाल समाज से जुड़े कांग्रेसी चेहरे इन दिनों खिले हुए हैं और उन्हें प्रदेश प्रभारी के रूप में उम्मीद नजर आ रही है। अब श्राद्धपक्ष खत्म होने के बाद दावेदार फिर हरकत में हैं। दीपावली से पहले ही आकाओं के जरिये राजनीति की 'ढोक पड़वा' शुरू हो चुकी है। मगर शहर अध्यक्ष बाकलीवाल पर 'नाथ' के सुरक्षा कवच से विरोधी कैसे पार पाते हैं, इस पर सभी की निगाह है।

पिता की गायन विरासत भी संभालने लगे आकाश

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी राजनीतिक यात्रा में आक्रामक बयानों के साथ ही सुरीली आवाज से भी लोकप्रियता हासिल की। वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में जाएं, जनता के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उन्हें माइक थमा गीत की फरमाइश कर देते हैं। स्थानीय राजनीति में पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे आकाश विजयवर्गीय के बयानों में अब तक अपने पिता जैसे तेवर तो देखने को नहीं मिले। मगर बल्ला पकड़ने से सुर्खियों में आने वाले विधानसभा क्रमांक तीन के विधायक अब माइक थामते नजर आ रहे हैं। गत दिनों माई मंगेशकर सभागृह में मराठी समाज के एक संगीत समारोह में जूनियर विजयवर्गीय ने भी मंच संभालते हुए गीत सुनाया। राजनीति की तरह ही गायन में भी उन्हें पिता के सुर पकड़ने में वक्त लगेगा, लेकिन सुरों के साथ शुरुआत अच्छी है।

सबको पास की आस

इंदौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच सालों बाद होते हैं, इसलिए जब होते हैं इंदौरियों की क्रिकेट दीवानगी गगनभेदी छक्के की तरह सातवें आसमान पर होती है। कुछ ही दिन हुए जब शहर में 100 से ज्यादा क्रिकेटरों की 'बरात' आई थी। तीन दिन में पांच मैच के बाद भी इंदौरियों की मैच की तलब खत्म नहीं हुई। अब चार अक्टूबर को होलकर स्टेडियम में फिर अंतरराष्ट्रीय मुकाबला है। भारत और दक्षिण अफ्रीका की इस टक्कर को देखने के लिए हर इंदौरी जुगाड़ में लगा है। आनलाइन बिक्री शुरू होते ही बुलेट ट्रेन की तेजी से खत्म हो गई। अर्थशास्त्र कहता है कि मांग बढ़ती है तो दाम बढ़ता है और इंदौर में टिकट की मांग बढ़ चुकी है। मप्र क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के अधिकारी ही नहीं, प्रदेश के क्रिकेट से किसी भी रूप में जुड़े व्यक्ति के पास इन दिनों पास की आस में फोन घनघना रहे हैं। जिन्हें पास या टिकट मिल गया, उन्हें धन्यवाद वरना रिश्ते बिगड़ते देर नहीं लगती। क्रिकेट के गलियारों में इस 'संकट' के जल्द टलने की आस की जा रही है।

रायशुमारी ने उड़ाई मालवा-निमाड़ के विधायकों की नींद

भाजपा प्रदेश संगठन ने विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। बीते चुनाव में मिली हार से सीख लेकर पार्टी नई रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी इस बार बड़े नेताओं की सिफारिश के बजाय सर्वे और रायशुमारी के आधार पर टिकट वितरण करने पर जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश के चुनावों में पार्टी का यह प्रयोग कुछ हद तक सफल भी रहा है। प्रदेश संगठन ने हाल ही में सभी विधानसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई है। इसमें करीब 60 विधायकों के बारे में नकारात्मक फीडबैक मिला है। इन 60 विधायकों में कई विधायक मालवा-निमाड़ के भी हैं। पार्टी की इस रायशुमारी के बाद अंचल के कई विधायकों की नींद उड़ी हुई है कि नकारात्मक फीडबैक वालों में कहीं उनका नाम तो नहीं है। वैसे इस तरह के फीडबैक कई बार नाम काटने का 'साधन' भी बनते हैं। हालांकि पार्टी ने अभी नामों का खुलासा नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि पार्टी यहां नए चेहरों पर दांव लगाएगी।

Posted By: Sameer Deshpande

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