इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खासगी ट्रस्ट द्वारा करोड़ों की संपत्ति को कौड़ियों के दाम बेचने के मामले में हाई कोर्ट में चल रही अपीलों में सोमवार को बहस शुरू हुई। शासन की तरफ से तर्क रखा गया कि ट्रस्ट को जमीन बेचने का अधिकार ही नहीं था। बगैर अधिकार ट्रस्ट ने जमीनों के सौदे किए और कौड़ियों के दाम बेच दी। ट्रस्ट की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को तर्क रखना था, लेकिन कोर्ट को बताया गया कि उनकी तबीयत खराब होने से वे अगली सुनवाई पर बहस करेंगे। इस पर कोर्ट ने ट्रस्ट को तर्क रखने के लिए 28 सितंबर की तारीख दे दी।

खासगी ट्रस्ट द्वारा होलकर राज्य की संपत्ति बेचने के मामले में दो अपीलें और एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में चल रही है। अपीलों में शासन ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी है तो जनहित याचिका में ट्रस्ट द्वारा बगैर किसी अधिकार के संपत्ति कौड़ियों के दाम बेचने को चुनौती दी गई है। जनहित याचिका विपिन धनेतकर ने एडवोकेट रोहित शर्मा के माध्यम से दायर की है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई जस्टिस एससी शर्मा और शैलेंद्र शुक्ला की युगल पीठ में हुई। सोमवार से ही अंतिम बहस भी शुरू हुई है। पहले दिन शासन की तरफ से तर्क रखे गए। शासन का कहना है कि होलकर राज्य की संपत्ति का नामांतरण शासन के नाम करने के कलेक्टर के आदेश में कोई अनियमितता नहीं है। खासगी ट्रस्ट को इन संपत्ति को बेचने का कोई अधिकार नहीं था। जनहित याचिका में भी ट्रस्ट द्वारा संपत्ति बगैर अधिकार बेचने का मामला ही उठाया गया है।

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