इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । राज्य शासन को शुक्रवार को हाई कोर्ट में बताना है कि चार साल पहले हुए रानीपुरा हादसे के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और क्या मृतकों के स्वजन को मुआवजा जारी कर दिया गया है। शासन को यह जवाब उस जनहित याचिका में देना है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होना है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2017 में शहर के रानीपुरा इलाके में पटाखे के अवैध गोदाम में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई थी। मामले को लेकर एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में दायर हुई है। इसमें मांग है कि मृतकों के परिजन को मुआवजे के रुप में 10-10 लाख रुपए और घायलों को 5-5 लाख रुपए दिलाए जाएं और जिन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से घटना हुई है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। शासन जवाब में हादसा होने की बात स्वीकार चुका है।

शासन ने जवाब में मृतकों के स्वजन को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने और घायलों का इलाज मुफ्त में कराने की बात स्वीकारी थी। इस पर याचिकाकर्ता ने रिजाइंडर दिया था और कहा था कि शासन जब घटना और लापरवाही की बात स्वीकार कर रहा है तो फिर हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। महामारी की वजह से याचिका लंबे समय से लंबित है। शुक्रवार को अंतिम बहस होना है।

आसपास के छोटे शहरों से आते हैं व्यापारी

जिस रानीपुरा इलाके में आग लगी थी वह सघन इलाका है। यहां बड़ी संख्या में इंदौर के आसपास के छोटे शहरों से बड़ी संख्या में व्यापारी खरीदारी के लिए आते हैं। महामारी की वजह से इस जनहित याचिका की सुनवाई लंबे समय से टल रही थी। उम्मींद जताई जा रही है कि शुक्रवार को अंतिम बहस सुनने के बाद कोर्ट याचिका को निराकृत कर सकती है।

Posted By: Sameer Deshpande

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