इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । सिर पर उल्लास, उमंग, ओज के प्रतीक लाल पीले रंग के साफे, हाथों में तानपुरा, खड़ताल, मंजीरे जैसे देसी साज और कबीर गायकी की सकारत्मक बयार लिए शहर में तीन दिवसीय साहित्य और कला के महाकुंभ का श्रीगणेश हुआ।

शुक्रवार की सुबह गांधी हाल परिसर में ठेठ देशज अंदाज में मुकेश चौहान ने साथियों के साथ कबीर गायन प्रस्तुत करते हुए साहित्य, संगीत और भाव की त्रिवेणी प्रवाहित कर दी। गुरु ज्ञान का सागर तमने लाख लाख वंदना व धीरे धीरे गाड़ी हाको मेरे राम गाड़ी वाले भजन प्रस्तुत लिए। इसके बाद माजिद खान ने साथी कलाकारों के साथ पधारो म्हारे देस की प्रस्तुति दी। ना केवल गायकी बल्कि घूमर नृत्य ने इसे और भी सजा दिया। मालवा से राजस्थान की रज का अहसास कराती इनकी प्रस्तुतियां आयोजन में अलग ही रंग ढंग घोल गई। पंड्या ने शिव तांडव स्त्रोत प्रस्तुत किया।

हेलो हिंदुस्तान द्वारा आयोजित इस लिटरेचर फेस्टिवल का प्रिंट पार्टनर नईदुनिया है। कला व साहित्य के रसिकों से भरे सभागार में एक ओर जहां ज्ञान का आदान प्रदान हो रहा था, वहीं दूसरी और अपने आदर्श लेखकों, साहित्यकारों से मिलने, उनका आटोग्राफ लेने और सेल्फी लेने का सिलसिला भी जारी रहा। अंजना चक्रपाणि मिश्र ने शुरुआती सत्र का संचालन किया।

ख्यात डा. आनंद रंगनाथन से नईदुनिया मप्र-छग के राज्य संपादक सद्गुरु शरण अवस्थी और डा. सरिता राव ने चर्चा की। ख्यात नृत्यांगना पद्मभूषण सोनल मानसिंह से सुचित्रा हरमलकर और सुगंधा बेहरे ने चर्चा की।

Posted By: Sameer Deshpande

NaiDunia Local
NaiDunia Local