Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत देश पर अंग्रेजों की बुरी नजर और बर्बता को हिंदुस्तानियों ने दो सौ वर्ष तक सहा। अंग्रेजी हुकुमत को यहां जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए हर दिन एक क्रांति हुई, असंख्य भारतीय उसका हिस्सा बने, न जाने कितनों ने बलिदान दिया तब जाकर आज की पीढ़ी खुली हवा में सांस ले पा रही है। अंग्रेजों के परतंत्र ‘इंडिया’ से भारतीयों के स्वतंत्र व स्वावलंबी ‘भारत’ तक के इसी सफर, संघर्ष और सफलता को शहर में बहुत खूबसूरत ढ़ंग से एक आयोजन के माध्यम से दर्शाया गया और यह प्रयास हुआ संस्था रस भारती के आयोजन में।

संस्था रस भारती द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत संगीतमयी कार्यक्रम ‘ये जो दश है मेरा’ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर स्थित सभागृह में हुआ। भारत के अतीत से लेकर वर्तमान की गाथा को इस आयोजन में पुणे की संस्था नीश इंटरटेनमेंट के कलाकारों ने प्रस्तुत किया। मिलिंद ओक की इस संकल्पना में गीत, संगीत, नृत्य, संवाद और क्लीपिंग भी थी इसलिए इस दृष्टी से इसे नृत्य नाटिका कहना ज्यादा मुनासिब होगा।

प्रस्तुति में देश की आजादी के लिए राजनेताओं का संगठित होना, विद्रोह के स्वर तीव्र करना और उनके साथ असंख्य आमजन की सहभागिता को कभी गीत तो कभी क्लीपिंग के जरिए बताया गया। महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री से लेकर अटल बिहारी बाजपेयी और नरेंद्र मोदी तक की बात इसमें की गई। प्रस्तुतिकरण कुछ इस तरह का था कि पूरे वृत्तांत को एक सूत्र में पिरोते हुए उसे कभी संवाद, कभी गीत और नृत्य तो कभी अखबार में प्रकाशित खबरों, रेडियो और टेलीविजन पर प्रसारित समाचारों की क्लीपिंग, कुछ वीडियो और कुछ चित्रों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया गया।

इसमें प्रमुख घटनाक्रमों को सिलसिलेवार बताया गया तो भाषण, रैली आदि के आडियो-वीडियो सुनाए-दिखाए गए। प्रस्तुति में प्रमुख स्वर धवल चांदवड़कर, चैतन्य कुलकर्णी, रसिका गानू, मृण्मयी तिरोड़कर के थे। नृत्य कुणाल फड़के, ऐश्वर्य काले, अभिषेक हवार्गी और ऋतुजा इंगले ने किया। सूत्र संचालन नचिकेत देवस्थल का था।

Posted By: Sameer Deshpande

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