इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News । दिगंबर-श्वेतांबर जैन समाज के सभी घटक रविवार को नृसिंह वाटिका एरोड्रम रोड पर साथ नजर आया। अवसर था अंतरराष्ट्रीय जैन फोरम द्वारा आयोजित समग्र जैन समाज के तपस्वियों का अलंकरण समारोह का। इसमें 8 से लेकर 68 उपवास करने वाले 274 तपस्वियों का सम्मान किया गया। सम्मानित होने वालों में 10 से लेकर 75 वर्ष के आयु वर्ग के लोग शामिल थे। इस अवसर पर संतों ने जैन एकता का अलख जगाया।

आचार्य प्रणाम सागर महाराज ने कहा कि हम सबको एक करने का सबसे बड़ा मंत्र भक्तामर स्त्रोत है। इसकी साधना से सबके जीवन में सुख, शांति और मानवता का भाव उत्पन्न होता है। तपस्या ही जीवन की हर समस्या का समाधान है। तपस्या से ही धर्म की शिक्षा की शुरुआत होती है। तपस्वियों को स्वर्ग से आकर देवता भी नमन करते हैं। जो लोग दबा दबाकर खाते है वह दवाखाने जाते हैं। अब कोरोना को भूलकर नव जीवन की शुरुआत और भक्तामर की आराधना करे।

इस अवसर पर कमल मुनि महाराज ने कहा कि समग्र समाज को सांप्रदायिकता से उपर उठना चाहिए। व्यक्ति को अपने जीवन में तीन बातोंं को ध्यान रखना चाहिए। सदा सद्भावना का भाव रखे, नैतिकता को जीवन का आधार बनाए और नशे से मुक्त रहे। फोरम के प्रणेता अशोक मेहता ने फोरम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कांतिलाल बम ने सामाजिक एकता पर विचार व्यक्त किए। भक्तामर आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर इस्कान के इंदौर प्रमुख महामनदास महाराज, ब्रह्माकुमारी जयंती बहन, सिख समाज के जसबीर सिंह गांधी, अक्षय बम मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत कल्पना पटवा और शांता भामावत ने मंगलाचरण से की। संचालन निर्मल कासलीवाल एवं राजेश चौरडिया ने किया।

कितने उपवास करने वालों को मिला कौनसा सम्मान

- 53 से 68 दिन उपवास करने वाले तीन लोगों को जैन रत्न सम्मान दिया गया।

- 30 से 36 दिन के उपवास करने वाले 20 तपस्वी जैन विभूषण से सम्मानित हुए।

- 16 से 22 उपवास करने वाले 18 साधकों को जैन भूषण सम्मान दिया गया।

- 8 से 13 उपवास करने वाले 233 तपस्वियों को जैन श्री अलंकरण दिया गया।

Posted By: Sameer Deshpande

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