Tourist Place In Indore इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारत की धरती आस्था, चमत्कार और प्रकृति के अनुपम नजारों से सजी-धजी है। यहां हर थोड़ी दूरी पर प्रकृति के अलग नजारे होते हैं तो अलग-अलग मान्यताओं और मतांतर के रंग भी दिख जाते हैं। विविधाओं की इन्हीं खूबियों का आनंद सबसे ज्यादा वे लोग उठाते हैं जिन्हें सैर-सपाटे का शौक हो, बदलाव को देखने की आदत और उसमें जीने का माद्दा हो। ऐसा ही एक स्थान है टिनोनिया माता मंदिर जो प्रकृति के अनुपम नजारों के साथ आस्था का केंद्र भी है।

इंदौर से महज 25-30 किमी दूर स्थित यह एक ऐसा स्थान है जहां वर्ष भर में कभी भी जाया जा सकता है। इंदौर से कनाड़िया गांव, सेमलियाचाऊ, दोलत बड़ौदा होत हुए टिनोनिया गांव पहुंचा जा सकता है। बदलते भारत की तस्वीर ने यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क की सुविधा दी तो आस्था के इस केंद्र में भक्तों ने मंदिर को सुविधायुक्त बना दिया।

देवास जिले के टिनोनिया गांव में पहाड़ी पर बिजासन माता का मंदिर बना हुआ है। गांव के नाम पर ही यहां बिजासन माता के इस मंदिर को टिनोनिया माता मंदिर भी कहा जाता है जो अब प्रचलित हो चुका है। मान्यता है कि माता की यहां स्वयंभू मूर्तियां हैं। यह मंदिर करीब पांच सौ वर्ष प्राचीन है। सिंदूरवर्णीय मां की मूर्ति के दर्शन और पूजा अर्चन के लिए नवरात्र में तो भक्तों का मेला लगा रहता है। यह स्थान अध्यात्म की दृष्टि से तो अहम है ही साथ ही प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बहुत आकर्षक है। करीब 60-70 सीढ़ी चढ़ने के बाद बिजासन माता के दर्शन होते हैं। पर्वत से दूर-दूर तक हरियाली और विहंगम दृश्य नजर आता है। पिकनिक करने के लिए भी यह माकूल स्थान है।

सोलो ट्रैवलर और यूथ होस्टल आफ इंडिया की सदस्य शिवानी किल्लेदार बताती हैं कि यहां अपने वाहन से पहुंचा जा सकता है। यहां जाने वाले मार्ग में दोलत बड़ौदा तालाब भी नजर आता है जहां सर्दी के दिनों में कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। टिनोनिया गांव से करीब 20 किमी दूर शुक्रवासा गांव है जो अपनी अलग ही खूबी के लिए जाना जाता है। यहां एक बहुत प्राचीन और बहुत बड़ा वटवृक्ष है। यह वटवृक्ष इतना विशाल है कि इसकी छाया में एक साथ चार-पांच सौ लोग खड़े हो सकते हैं। यहां तक का सफर और भी खूबसूरत है। हरियाली के बीच से होकर गुजरता संकरा रास्ता और आसपास नजर आते गांव सफर को सुहाना बना देते हैं। घुमावदार रास्ते वाले इस स्थान पर यदि आप जा रहे हैं तो प्रयास करें कि स्थानीय नागरिकों की मदद लें और सूर्यास्त के पहले शहरी सीमा में आ जाएं।

फोटो: प्रफुल्ल चौरसिया, आशु

Posted By: Sameer Deshpande

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