इंदौर। शहर में तीन अलग-अलग तरह का डेंगू कहर बरपा रहा है। तीनों के लक्षण और प्रकृति भी अलग-अलग है। इनका असर एक सप्ताह से लेकर 6 महीने तक रहता है। मरीजों के ब्लड सैंपल में अब तक डेंगू की पुष्टि इसलिए नहीं हो रही थी क्योंकि सैंपल उन मरीजों का भेजा जा रहा था जिन्हें इसकी चपेट में आए 5-7 दिन बीच चुके थे। इस बार उन मरीजों का सैंपल भेजा गया जिन्हें चपेट में आए दो-तीन दिन ही हुए थे।

यह खुलासा जबलपुर वायरोलॉजी लैब से शनिवार को मिली जांच रिपोर्ट में हुआ है। जून के मध्य से शहर की जनता बुखार और जोड़ों के दर्द से परेशान है। अस्पताल और क्लीनिकों के बाहर लगी मरीजों की कतार इसकी पुष्टि कर रही है। जांच में न चिकनगुनिया की पुष्टि हो रही थी न डेंगू की। बीमारी का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 9 मरीजों के ब्लड सैंपल जबलपुर की वायरोलॉजी लैब भेजे थे, लेकिन वहां जांच में कुछ नहीं मिला। इस पर दोबारा 9 मरीजों के ब्लड सैंपल जबलपुर भेजे गए।

ये सैंपल उन मरीजों के थे जिन्हें बुखार और जोड़ों के दर्द की चपेट में आए दो-तीन दिन ही हुए थे। आईडीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. आशा पंडित ने बताया कि जबलपुर से मिली जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर में तीन अलग-अलग तरह के डेंगू कहर बरपा रहे हैं। इन्हीं की वजह से शहर की जनता बुखार और जोड़ों के दर्द से परेशान हो रही है। विभाग इस बात की पुष्टि के लिए कुछ और सैंपल जबलपुर भेजेगा। डॉ. पंडित ने बताया कि भेजे गए सैंपलों में दो मरीजों में चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है। स्वाइन फ्लू का भी एक मरीज मिला है। वर्तमान में अस्पताल में स्वाइन फ्लू के 6 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 5 की हालत गंभीर है।

5 तरह के होते हैं डेंगू

डेंगू एडिज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इसके पांच प्रकार होते हैं। इन सभी के लक्षणों में मामूली सा अंतर होता है। डॉ. पंडित के मुताबिक इंदौर में टाइप 1, 2 और 4 तरह का डेंगू मिला है। सैंपल जबलपुर भेजने का सिलसिला जारी रहेगा। शनिवार को वहां से मिली जांच रिपोर्ट के बाद कहा जा सकता है कि शहर की जनता पांच महीने से जिस वजह से परेशान है वह डेंगू ही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेजे गए सात सैंपलों में भी डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।

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