जितेंद्र यादव, इंदौर। मिलावटी और सिंथेटिक दूध की जांच के लिए इंदौर दुग्ध संघ ने एक नई मशीन बुलाई है। डेनमार्क में तैयार हुई 'मिल्को स्क्रीन' नामक इस मशीन में केमिकल का उपयोग किए बिना दूध की मिलावट पकड़ में आ जाएगी। इस मशीन में यूरिया, शकर, अमोनियम सल्फेट आदि की मिलावट का आसानी से पता चल सकेगा।

संघ ने ऐसी पांच मशीनें बुलवाई हैं और सांची दूध के इंदौर प्लांट पर फिलहाल इस मशीन का ट्रायल चल रहा है। ट्रायल के बाद इंदौर दुग्ध संघ के खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर प्लांट पर भी ये मशीनें भेजी जाएंगी। मशीन की उपयोगिता को देखते हुए दुग्ध संघ ने केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट के तहत इस तरह की 150 मशीनें लेने का प्रस्ताव भेजा है।

यह मशीन एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तरह है। दुग्ध संघ के सीईओ एएन द्विवेदी के मुताबिक दूध की कीमत उसके एसएनएफ और फैट से तय होती है। फैट बढ़ाने के लिए वनस्पति तेल की मिलावट की जाती है, लेकिन यह दूध में मिक्स नहीं होता, इसलिए यह मिलावट आसानी से पकड़ में आ जाती है। ऐसे में मिलावटखोर दूध का सॉलिड नॉन फैट (एसएनएफ) यानी प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट सहित अन्य मिनरल्स को बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

इसके लिए शकर, यूरिया, अमोनियम सल्फेट की मिलावट करते हैं ताकि दूध की डिग्री बढ़ जाए। इससे दूध का एसएनएफ बढ़ा हुआ आता है जिससे लगता है कि दूध में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अधिक है। हम अपनी प्रयोगशाला में इसी की जांच करते हैं कि दूध का एसएनएफ बढ़ाने के लिए मिलावट तो नहीं की गई है? इस जांच में मिल्को स्क्रीन मशीन काफी मददगार साबित होगी। ट्रायल पूरी होने के बाद खंडवा, खरगोन, बड़वानी और बुरहानपुर केंद्रों पर भी इस मशीन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन से 150 मशीनों की मंजूरी मिलने के बाद इंदौर दुग्ध संघ से जुड़े संभाग के 137 बल्क मिल्क सेंटर (बीएमसी) पर ये मशीनें स्थापित की जाएंगी।

मशीन में प्राकृतिक दूध की मैपिंग, असामान्य हुआ तो सात मिनट में बताएगी

दूध में प्राकृतिक रूप से कुछ तत्व होते हैं जो एक निश्चित और विशेष मात्रा में मौजूद होते हैं। इंदौर दुग्ध संघ के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर एमएक्यू कुरैशी के मुताबिक मिल्को स्क्रीन मशीन में प्राकृतिक दूध की मैपिंग की गई है। यह उसी तरह है जिस तरह हम किसी व्यक्ति का फिंगर प्रिंट लेते हैं और बाद में उसकी कॉपी नहीं की जा सकती। इस मशीन में जांच के लिए दूध का नमूना रखने के पांच-सात मिनट में रिपोर्ट सामने आ जाती है। दूध के नमूने में प्राकृतिक रूप से मौजूद तत्वों का स्तर गड़बड़ाएगा तो उस दूध को मशीन असामान्य बताएगी। इसमें यह भी पता चलेगा कि दूध में यूरिया, शकर, नमक, अमोनियम सल्फेट में से क्या मिला है।

Posted By: Nai Dunia News Network

fantasy cricket
fantasy cricket