इंदौर। ठंड का मौसम यानी खाने-पीने के दिन। इस मौसम में होने वाला सर्दी-जुकाम यूं तो सामान्य नजर आता है, लेकिन कई बार सामान्य दिखने वाला जुकाम इतना विकराल रूप अख्तियार कर लेता है कि मरीज की जान पर बन आती है। स्वाइन फ्लू के वायरस के लिए भी यह मौसम अनूकुल होता है। यही वजह है कि इन दिनों इस बीमारी के मरीजों की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रहती है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम से कुछ अलग नहीं होते हैं, लेकिन देखते ही देखते इसका वायरस फेफड़ों को जो नुकसान पहुंचाता है उसकी भरपाई आसान नहीं होती। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना। सबसे खास बात कि सर्दी-जुकाम को हल्के में लेने के बजाय सीधे डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि जुकाम को हल्के में लेना आपको भारी पड़ सकता है।

नईदुनिया के कार्यक्रम 'हैलो नईदुनिया' में शुक्रवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सलिल भार्गव लोगों से मुखातिब हुए। स्वाइन फ्लू को लेकर उन्होंने बताया कि इसका वायरस पूरे साल सक्रिय रहता है, लेकिन ठंड के मौसम में इसका प्रकोप बढ़ जाता है। हर दस में से चार व्यक्तियों को मौसमी सर्दी-जुकाम होता है। सर्दी-जुकाम कई वायरसों की वजह से होता है। दिक्कत तब होती है जब यह वायरस एच1एन1 हो। यह वायरस सीधे फेफड़ों पर आक्रमण करके उनकी अंदरूनी झिल्ली को छील देता है। इसका असर सांस नली पर भी पड़ता है। यही वजह है कि इस वायरस का आक्रमण होते ही मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

सर्दी-जुकाम, बुखार, सिरदर्द, थकान, गले में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, भूख न लगना, नाक बहना, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी दस्त। सर्दी-जुकाम के साथ उपरोक्त में से कोई भी चार लक्षण हो तो मरीज को स्वाइन फ्लू हो सकता है। लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इन्हें होता है ज्यादा खतरा

जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है एच1एन1 वायरस उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाता। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, पांच साल से छोटे बच्चे, मधुमेह के मरीज, ऐसे व्यक्ति जिन्होंने ट्रांसप्लांट कराया है उनके एच1एन1 वायरस की चपेट में आने की आशंका ज्यादा रहती है।

बीमारी से बचने के लिए यह करें

- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित व्यायाम करें।

- फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्राणायाम करें। पैदल चलना रस्सी कूदना जैसे व्यायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं।

- खानपान में ऐसी चीजें शामिल करें जिससे शरीर को विटामिन ए, सी, डी और बी कॉम्प्लेक्स पर्याप्त मात्रा में मिल सकें। विटामिन ए के लिए गाजर, पपीता, सेब खाएं। विटामिन सी के लिए नींबू, संतरा खाया जा सकता है। विटामिन डी की कमी दूर करने के लिए 10-15 मिनट धूप में बैठें, दूध अंडे का सेवन करें। खानपान में हरी सब्जियां शामिल करें।

यह बिलकुल न करें

- सर्दी-जुकाम होने पर खुद डॉक्टर बनने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

- सर्दी-जुकाम के मरीज के सीधे संपर्क में आने से बचें।

- सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का रूमाल, टॉवेल, मोबाइल इत्यादि इस्तेमाल करने से बचें, भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें।

- खांसते, छींकते वक्त मुंह पर रूमाल रखें, मास्क लगाएं।

- परिवार में किसी को स्वाइन फ्लू हो जाए तो घबराएं नहीं। इलाज कराएं, स्वाइन फ्लू के मरीज का इलाज जितनी जल्दी शुरू होता है उतनी ही जल्दी फायदा होता है।

- सेंट्रल एसी वाले दफ्तर में इस बीमारी के फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। दफ्तर में किसी साथी को सर्दी-जुकाम होने पर उसे छुट्टी दे दें।

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